चित्रकोट क्यों सूख गया ?

जगदलपुर वैसे तो कई देखने लायक जगहें है मगर जो सबसे सुलभ और उसे निहारने के लिए लोग अक्सर जाते हैं वो है चित्रकोट और तिरथगढ़ जलप्रपात । जिसे देखने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में लोग आते है। इन दोनों ही जगहों पर वन एवं लोक निर्माण विभाग ने ठहरने के लिए तथा खाने पीने के लिए होटल्स का निर्माण कराया है ।
ये दोनों ही जगह पिछले दिनों काफी सुर्खियों में थीं । तीरथगढ़ में एक तमिल फिल्म की शूटिंग हुई तो चित्रकोट में प्रति वर्ष की तरह महोत्सव का आयोजन किया गया। गर्मियों में ये दोनों जगहें एक और बात के के लिए अखबारों और आम जनों की नज़रों में आते है वे है यहां की छटा।
चित्रकोट जलप्रपात को पर्यटन विभाग ने मिनि नियाग्रा का नाम दिया है । और इसे लेकर खूब वाही-वाही भी लूटी है। देश के दो दो राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और रामनाथ कोविद यहां की छटा देखने के लिए बकायदा चित्रकोट में नज़दीक बने रेस्ट हाउस में एक रात ठहर चुके है तो वहीं प्रदेश के गर्वनर भी एक रात यहां की छटा निहार चुके हैं ।

 

कृपया इसे भी देखें

गर्मियों का चित्रकोट

मगर आज यह चित्रकोट जलप्रपात को देखने से ऐसा लगाता है जैसे किसी शरीर से मांस निकाल लिया गया है और केवल हड्डियों का ढांचा रह गया है। जी हां गर्मियों के मौसम आते ही चित्रकोट का पानी अप्रेल  में ही सूख जाता है और जोरदार गर्जन के साथ गिरते पानी के इस झरने में केवल पत्थर ही दिखाई देते है। स्थानीय निवासियों की माने तो यह हालत पहले नहीं होती थीं । पहले 12 महिने यह प्रपात पानी से लबालब हुआ करता था। और साल भर देश विदेश से इसे देखने आया करते थे। मगर अब वैसी हालत नहीं रही ।पर्यटक और पानी दोनों ही इस प्रपात से गायब हो चुके है।

क्या कारण है?

पहले तो जानते हैं चित्रकोट में पानी केवल काला हांड़ी  से निकलने  वाले पानी इंद्रवती नामक नदी से यहां आती है और यह नदी उड़िसा से छ.ग. राज्य में प्रवेश करती है।

भस्केल नदी के बहाव की दिशा चेक डैम के माध्यम से वापस उड़िसा भेज दी गई जो कभी इंद्रवती के बहाव का हिस्सा हुआ करती थी और अंधिकांश पानी भस्केल का इंद्रावती में मिलकर छत्तीसगढ़ आता था। अब बंद हो चुका है। लिहाजा चित्रकोट की गर्जना कम तो होनी ही थी।

अविभाजित मध्यप्रदेश और इससे लगे उड़िसा के बीच पानी के बंटवारे को लेकर सन 1999 में एक सहमति बनी थी जिसके तहत इंद्रावती का पानी जो चित्रकोट में आता है को बांट दिया गया था और उड़िसा सरकार ने सीमा से सटे जोरानाला पर एक कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने पर सहमति हुई थी । मगर कथित रूप से उड़िसा सरकार ने पानी का अधिकांश हिस्सा अपने पास रख लिया। जिससे इसकी धारा कम हो गई । और जोरा नाला में स्टाप डैम का निर्माण भी नहीं किया गया। जिससे पानी वापस उड़िसा में ही चला जाता है। छग को कुछ हासिल नहीं होता है।

बस्तर पर्यटन को समर्पित  Unexplored Bastar के मुताबिक उक्त कारणों में से कुछ कारण और भी हैं

 

क्या है वे

छ.ग और उड़िसा में कई जगहों पर स्टाॅप डैम का निर्माण किया गया है जहां पानी बंट जाता है।
उड़िसा में इन्द्रावती नदी के ऊपरी भाग में खाटी गुड़ा बांध का निर्माण किया गया है।
दोनों राज्यों में कथित राजनीतिक विवाद के चलते उड़िसा सरकार द्वारा पानी नहीं छोड़े जाने के कारण पानी पर्याप्त मात्रा में छग नहीं आ पाता है।
इसके अलावा एक और बात समझ में आती है कि जल प्रपात के आसपास अंधाधुन्ध चेकडैम बनाए गये है जो आसपास की जगहों पर पानी की आपूर्ति करती है । स्टाप डैम के पानी का नदी से सटे लोगों द्वारा जरूरत से ज्यादा दोहन किया जा रहा है।

अब इसका उपाय क्या है

सबसे पहले तो छ.ग. सीमा से लगे जोरा नाले पर स्टाप डैम की जरूरत है उसका निर्माण होना चाहिए । इस दिशा में प्रदेश सरकार स्तर पर पहल जरूरी है। जो विधायक व सांसद इस बात को सरकार के समक्ष उठायेंगे तो काम में तीव्रता आयेगी ।

साथ स्थानीय प्रशासन को अपनी सिंचाई योजना पर पुनः विचार करना चाहिए। और बेकार या गैर जरूरी स्टाॅप डैम को बंद किया जाना चाहिए।

छोटी धाराओं का पुनरूथान किया जाना चाहिए। तथा मौजूदा पानी का अंधाधुंध दोहन न हो

पानी जो स्टोर किया गया है उसे तुरन्त छोड़ा जाए ताकि चित्रकोट अपने असली रूप में आ सके।

जल संरक्षण की समस्त योजनाओं को सख्ती से लागू जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न हो सके।

सबसे अहम बात नदी,नाले व धाराओं के प्राकृतिक मार्ग में किसी भी प्रकार की सिंचाई व निर्माण कार्य पर रोक लगे।

किसानों /कारखानों के द्वारा गैर कानूनी पानी के उपयोग पर रोक लगे

इनमें से अगर 40 फीसदी सुझावों पर अमल हो तो चित्रकोट जीवित हो सकता है वरना आने वाली पीढ़ी चित्रकोट को केवल बरसात में ही देखेगी। बाकि मौसम में देखना हो तो youtube है न !

 

कुछ दिनों के बाद पर्यावरण एवं पर्यटक प्रेमियों के विरोध के कारण कुछ ऐनिकेट के कपाट खोले गए और चित्रकोट अपने वास्तविक रौनक
में आ गई। मगर इतना कुछ करने में प्रशासन को लगभग एक महिना लग गया । और तब तक पर्यटकों को निराश ही लौटना पड़ा।

 

 

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Author: adji

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