विकास में बाधक कौन?

विकास में बाधक कौन?

दुनियां में दो तरह के कर्मचारी होते है

एक वो जो काम करते है

और दूसरा काम का श्रेय लेते हैं ।
पहले वाले श्रेणी में प्रतियोगिता कम होती है क्योंकि यहां लोग ही नहीं मिलते । ऐसे ही एक कम्पनी कार्यालय में कई कमचारी काम करते थे जिसमें एक से बड़कर एक लोगों ने नौकरियां पायी थी मगर एक बात उस

People working in an office

कम्पनी कार्यालय में उठती थी कि एक शख्स जो कर्मचारियों की विकास को थाम लेता है । आपसी सामंजस्य के अभाव में सारे कर्मचारी एक दूसरे से ईष्या किया करते थे। वह दिन एक आम दिनों की तरह था । कम्पनी कार्यालय में एक दिन सुबह 10 बजे जब सभी कर्मचारियों ने ऑफिस के बाहर एक बोर्ड पढ़ा तो चौक गए साथ ही उन्हें एक प्रश्न सताने लगा कि क्या हुआ?
बोर्ड पर लिखा था- जो आपके कार्य में और आपकी प्रगति में बाधा पहुॅचाता था कल शाम उसकी मौत हो गई है । उसका उठावना ऑफिस के व्यायाम शाला में रखा गया है। कृपया 11 बजे उपस्थित होवें । ’’
कर्मचारियों में ये नोटिस पढ़कर दिवंगत के प्रति सहानुभूति कम कौतूहलता ज्यादा बढ़ने लगी ।
सभी कर्मचारियों को ये पढ़कर जानने की इच्छा हुई आखिर वो कौन है जो मेरे विकास में बाधक है । दूसरी तरफ एक सुकुन भी था चलो अच्छा हुआ वो गुजर गया। नहीं तो मेरा विकास रूक जाता ।
नोटिस में कहा गया था कि उसकी आत्मा की शांति के लिए उसके ताबूत के समीप ही रखी गई है । सभी को ये जानकार आश्चर्य हुआ कि ताबूत भी उसकी यहीं है तो चलो एक बार उसे जान भी लेते है कि वो कौन है । कर्मचारियों में जर्बदस्त कौतूहलता बनी हुई थी । सभी इस बात को जानने का ज्यादा इच्छुक थे कि वो कौन है जिनके कारण उनका और कम्पनी का विकास रूक सा गया था।
बहरहाल जिस जगह पर ताबूत रखा था

People working in an office

उस जगह को दुरस्त करने के लिए सुरक्षा गार्डस की मदद ली गई थी और लोगों उस ताबूत के भीतर झांक कर ये पता लगाने की कोशिश करना चाहते थे कि वो शख्स आखिर कौन है? मगर सुरक्षा गार्डस ने किसी को भी ताबूत के नजदीक आने नहीं दिया और एक के बाद एक लोग जमा होते गए। सभी को इंतेजार था कि चेयरमेन आएं तो प्रार्थना शुरू की जा सके , मगर मलाल इस बात का था कि किसी को उस ताबूत में रखे मृत शरीर को सुरक्षा गार्ड किसी को देखने नहीं दे रहे थे। इतने में चेयरमेन आए और उन्होंने कहना शुरू किया और कहा कि ये वो शख्स है जो हमारे बीच ही का है अब वह नहीं रहा, आखिर में वो बात कहीं जिसकी सबको प्रतिक्षा थी यानि ताबूत के अंदर लेटे उस व्यक्ति का दर्शन करना जो कभी दोबारा नहीं आएगा।
चेयरमेन ने कहा सभी बारी बारी से एक लाईन से आते हुए यहां उसको अंतिम प्रणाम करें । जैसे ही कर्मचारी एक एक करके आते गए और ताबूत में रखे शख्स को देखा तो उनकी आंखे फटी की फटी रह गई उनका कहना था कि ये कैसे और क्यों
क्योंकि ताबूत में एक आईना रखा था जो भी उसमें झांकता उसमें उसका प्रतिबिम्ब ही नजर आता था। यानि वह शख्स जो आपकी विकास का बाधक था।
ये तो सच है कि किसी के विकास या पतन का कारण स्वयं ही होता है । ये दुनियां ये आईने की तरह ही है। ये उसी तरह लोगों को नजर आती है या दिखाई देती है जिसे विचार धारा के आप स्वयं है । यानि ताबूत में रखा आईना स्वयं व्यक्ति और ताबूत दुनिया है जिसमें हम अपना प्रतिबिम्ब देखते है। आमतौर पर दुनियां में काम करने वाले कम काम का श्रेय लेने वाले ज्यादा होते हैं।

adji

Leave a Reply

Your email address will not be published.