Who is Saav ji Dholakiya

आज के परिवेश में ’’पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब’’ की कहावत चरितार्थ होती नहीं दिखती । क्योंकि ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल जाते है जो बिना पढे-लिखे ही ऐसी ज़िदगी गुजार रहें है जन्हें हम नवाबों की श्रेणी में रख सकते है। ठाठ-बाट ऐसे की अच्छे-अच्छे रहिसों को मात दे दें ।  किसी फिल्म कलाकार का उदाहरण देख लिजिए ! या किसी उद्योगपति का उदाहरण ।उनकी शैक्षणिक गतिविधयों पर नज़र डालें तो वे जीवन में संघर्ष करते हुए आज इस मुकाम पर हैं जिसमें न केवल अपना बल्कि अपने साथ जुड़े लोगों का भला कर रहें है। बात करते है ऐसे ही व्यवसायी  साव डोलकिया के बारे में ।

कौन है साव डोलकयाः-

गुजरात के अमरेली में जन्मे साव डोलकिया ने केवल 4 थीं कक्षा तक अपनी स्कूली पढ़ाई की है। 13 साल की उम्र में ही स्कूली पढ़ाई में मन नहीं लगा तो वे अपने चाचा के धंधें हीरा व्यवसाय में रम गए। 1984 में उनके साथ उनके भाई हिम्मत और तुलसी भी जुड़ गए । आगे चलकर अपने छोटे भाई छोटे भाई घनश्याम के साथ 1992 में हीरा निर्यात करने वाली हरीकृष्ण एक्सपोर्ट नामक कम्पनी बना डाली।

2014 आते-आते यह कम्पनी भारत की सबसे बड़ी हीरा निर्यात करने वाली कम्पनी बन गई। जिसमें 6500 कर्मचारी काम करते है।

परिवार 
साव जी ढोलकिया की पत्नि का नाम गौरीबेन एस धोलकिया है। तथा उनकी दो पुत्री तथ एक पुत्र है जिनके नाम है मीणा सिमेदिया, निमिशा धोलकिया तथा द्रव्य धोलकिया हैं
2014 में ये कम्पनी उस समय सुर्खियों में आई जब इस कम्पनी ने दीवाली उपहार के तौर पर अपने 600 कर्मचारियों को कार, जवाहरात और घर दिया। इनकी कम्पनी ने 491 कार , 525 हीरे के टकड़े और 200 अपार्टमेंट का उपहार दिवाली में दिया जिसकी लागत 50 करोड़ रूपये आंकी गई है। तीन खास कर्मचारियों को उन्होंने मर्सडिज बेन्ज दी । धोलकिया जी की कम्पनी आज उद्योग जगत मेें टाॅप 5 कम्पनियों में उनकी कम्पनी हरीकृष्ण एक्पोर्ट मानी जाती है । दीवाली पर वे हर बार अपने कर्मचारियों को मंहगी गिफ्ट देने के कारण चर्चाओं में बने हुए हैं।

मूलतःगुजरात के रहने वाले साव जी ढोलकया अपने इस कार्य को लेकर मिडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थी और दूसरे शब्दों में ऐसे न्यौक्तओं को सोचने पर मजबूर कर दिया था जो अपने कर्मचारियों के प्रति बेहद उदासीन है और उन्हें अपने यहां काम पर तो रखते हैं मगर उन्हें कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करते ।

एक बयान से धोलकिया फिर आए सुर्खियों में

सूरत के एक टैक्नों सर्मपण स्कूल के कार्यक्रम में उन्होंने बोलते हुए सीधा अभिभावकों को सोचने पर मजबूर कर दिया । उन्होंने कहा कि अगर आने वाले समय में आपके घर कोई पागल न जन्म ले तो अभी से मोबाईल के इस्तेमाल पर नियंत्रण रखो उन्होंने कहा संतानें आजकल अपने पिता से आलस्य और मां से गालियां सीख रहा है। उन्होंने कहा कि आज हर आदमी डिप्रेशन में जी रहा है और मोबाईल फोन आदमी को पागल बना रहा है। धोलकिया ने कहा कि उनकी कम्पनी में हर जाति तथा वर्ग के लोग काम करते हैं और जिस तरह से उनके साथ काम करते हुए धोलकिया जी काअनुभव रहा है वे कहते है आज बच्चों को नहीं अभिभावकों को बहुत कुछ सीखाने की जरूरत है । आज का दौर परिवर्तन का दौर है। लोगों की आदतें विचार बदल रहें है जो टैक्नोलाॅजी को अपने उपर हावी न होने दें ।
यानि ईशारा सीधा है कि तकनीकी का जानकार होना जरूरी है मगर उसका गुलाम होना अच्छी बात नहीं ।
धोलकिया जी ने कहा कि बच्चे आजकल न जानने वाली चीजें भी मोबाईल से सीख रहें हैं ।
ढोलकिया का टर्नओवर 2014 में 400 करोड़ रूपये पंजीकृत किया गया था। इनकी ज्वेलरी अमेरिका, चीन, हांगकांग सहित 50 देशों में भेजी जाती है।
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Author: adji

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