What is IED ? क्या है IED ?

9 मार्च 2019 को भाजपा के विधायक भीमा मंडावी के काफिले को नक्सलियों ने आईईडी ब्लाॅस्ट कर उड़ा दिया । जिससे मंडावी समेत 4 पुलिस के जवान शहीद हो गये।
इसी तरह 14 फरवरी 2019 को आंतकवादियों ने कश्मीर के पुलवामा में जवानों के काफिले पर उस वक़्त हमला किया जब वे जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे और यह हमला भी आईईडी ब्लाॅस्ट कर किया गया था।
देश में कई आईईडी ब्लाॅस्ट हुए है जिसमें सैकड़ों लोगों की जाने जा चुकी है। एक नज़र उन घटनाओं पर डालते हैं
जम्मू कश्मीर में ही 11 दिसंबर 2018 को किया गया था जिसमें 19 जानें गई और 130 लोग घायल हो गये थे।
ऐसा ही हमला 2013 को हैदराबाद में और 2016 को पठानकोट में  किया गया था जिसमें कई लोगों की जाने चली गई ।
अक्सर सुनने में आता है कि आईआईडी ब्लाॅस्ट कर घटना को अंजाम दिया गया ।

क्या है आईईडी ब्लाॅस्ट

आईईडी एक तरह का बम होता है जिसे गैर मिलिट्री के लोग उस वक़्त इस्तेमाल करते है जब उन्हें भारी पैमाने पर नुकसान करना होता है। यह मूलतः आतंकी संगठनों द्वारा किया जाता है। जैश कमांडर राशिद गा़जी को आईईडी का एक्पर्ट बताया जाता है। ये परम्परगत सैनिक कार्य के लिए उपयोग किये गए बमों से भिन्न होते हैं ।
आईईडी ब्लाॅस्ट होते ही मौके पर आग लग जाती है क्योंकि इसके अंदर काफी मात्रा में केमिकल मिले होते है जो आग फैलाने का काम करते हैं । इसे जमीन के अंदर इस प्रकार रखा जाता है जिसमें भार पड़ते ही विस्फोट हो जाए । इसे रिमोट कंट्रोल, मैगनेटिक ट्रिगर्स, इन्फ्रारेड, पे्रशर सेंसिटिव बार्स तथा ट्रिप तारों की सहायता से भी नियंत्रित किया जाता है। इस ब्लाॅस्ट में धुंआ भी काफी मात्रा में निकलता है।
आईईडी का अर्थ होता है ईम्प्रोवाईज्ड एक्सप्लोसिव डिवाईस यानि तैयार किया गया विस्फोटक । इसकी तीव्रता इतनी होती है कि बड़े-बड़े वाहन हवा में उछल जाते है और दूर जा गिरते है। विस्फोट होते ही इसमें तुरंत आग भी लग जाती है । और जमीन पर एक गड्डा निर्मित हो जाता है। इस प्रकार के बम में जो केमिकल डाले जाते है वे अति ज्वलनशीन होने की वजह से काफी घातक होते है।
चूंकि यह जमीन में गड्डे बनाकर इसे रखा जाता है तो एक निश्चित दूरी तक ही बम तलाश करने वाली डिवाईस इसे देख व समझ पाती है।

आईईडी बम क पांच हिस्से

एक स्वीच दूसरा फ्यूज तीसरा बाडी fourth चार्ज और पांचवां बैटरी

इसमें घर्षण पैदा करने के लिए नाखून, बाॅल बेयरिंग तथा कंकड़ डाले जाते है जिससे ये विस्फोट के बाद दूर मौजूद लोगों को भी नुकसान पहॅुचाता है। इसे डिसमाऊंटेड ब्लाॅस्ट इन्जुरी कहते है। युद्ध में होने वाले इस प्रकार के नुकसान को सबसे दर्दनाक माना जाता है।
ऐसा बताया जाता है कि आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के कमांडर राशिद गा़जी को इस प्रकार के बम बनाने की दक्षता हासिल है ।
बस्तर जिले में इस प्रकार के blasts से कई जाने जा चुकी है। जिसमें नक्सलीसंगठनों ने आईआईडी ब्लाॅस्ट से ऐसे घटना को अंजाम दिया है। जिससे जान माल को नुकसान पहॅुचा है। नक्सलवाद के दंश से बस्तर काफी समय से जूझ रहा है। 25 मई 2013 को नक्सलियों ने Congress के काफिले पर भी हमला किया था जिसमें देश के बड़े नेताओं की जान चली गई थी। जिनमें नंद कुमार पटेल उनके बेटे और महेन्द्र कर्मा, और विद्याचरण शक्ल भी थे । इस हमले में विद्याचरण शक्ल बुरी तरह से घायल हो गये थे । और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

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Author: adji

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