बस्तर में आम का त्यौहार

बस्तर में जनजातिय त्यौहारां का विशेष महत्व है । वे प्रकृति से प्राप्त हर फसल पर कुछ -न-कुछ रस्म करके उसका उपयोग करते हैं धान,ईमलीRead More

दंतेवाड़ा का फागुन मेला।

को नृत्य संगीत का कार्यक्रम आयोजित होता है। इस कार्यक्रम में कलार और कुम्हार जातियों के लोग भाग लेते हैं ।
दंतेवाड़ा में 11 दिन तक चलने वाले फागुन मड़ई में 9 वें दिन होलिका दहन किया जाता है ।

बस्तर में अनूठी होली

में इस दिन कोई रंग गुलाल नहीं खेला जाता है । मान्यता के अनुसार इस दिन सभी माड़पाल की होली में शरीक होते है परिणामस्परूप ग्राम कलचा खाली रह जाता है। यहां रंग पंचमी को रंग गुलाल खेल कर होली मनाई जाती है…..

बस्तर-आदिवासी समाज की मान्यताएं

बस्तर में आदिवासी समाज के विषय में पड़ताल के संपादित अंश. जिस तरह हमारा शरीर पाँच तत्वों से बना है, उसी तरह आदिवासी समाज भी मानता है कि उसकी काया माटी से बनी है