Story of River Indravati कहानी इंद्रावती नदी की

बस्तर में इन दिनों चुनावी माहौल के अलावा जिसकी चर्चा ज्यादा हो रही है वह है चित्रकोट का जलप्रपात और नदी इंद्रवती बचाओ मुहिम की । चित्रकोट जल प्रपात इंद्रावती के बिना अधूरा है क्योंकि इंद्रावती का बहाव ही चित्रकोट जलप्रपात का निर्माण करती है।
मगर बेहिसाब चैकडैम के निर्माण ने इंद्रवती के बहाव को घटा दिया है और इसका सीधा असर चित्रकोट की सुन्दरता पर पड़ा है। चित्रकोट अब केवल बरसाती प्रपात ही बन गया है । इस गर्मी में चित्रकोट ही गायब हो गई तो पर्यावरण तथा पर्यटन प्रेमियों का गुस्सा फूट पड़ा । और लगातार विरोध के बाद ही कुछ एनीकेट के कपाट खोले गए और चित्रकोट अपने वास्तविक अंदाज में दिखा। पूरे महिने जिले की युवाओं ने अपना दमखम दिखाए और अब वे इंद्रावती बचाव की दिशा में जुट गए हैं । क्योंकि इंद्रावती भी अपने वास्तविक रूप में अभी तक नहीं आई है । इसके बारे में विस्तृत चर्चा हमने अपने ब्लाॅग में किया है

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इंद्रावती बचाव अभियान बड़े जोर शोर चल रहा है । शासन को चेताने की मुहिम शुरू हो चुकी है ऐसे में इंद्रावती के बारे में जानकारी रखना सबको जरूरी हो जात है। इस लेख के माध्यम से हम इंद्रावती के वर्तमान तथा इतिहास की बात करेंगें

कहानी इंद्रावती नदी की

इंद्रावती नदी उड़िसा के कालाहंडी जिले की मुंगेर पहाड़ से 2999 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरती है । यह पहाड़ कालाहांडी के धरम गढ़ तहसील में है। और यह पूर्व से पश्चिम की तरफ बहुत हुए छ.ग. आती है और यहां चित्रकोट जलप्रपात का निर्माण करती है। इसी बीच उसे आजकल भस्केल के संगम से को 100 मीटर दूर एक एनीकेट का सामना करना पड़ता है जिससे उसका अधिंकाश पानी वापस उड़िसा चला जाता है।
यहां इसकी कुल लम्बाई 535.80किमी है और अंत में यह बीजापुर जिले के भद्रकाली के पास गोदावरी में मिल जाती है।

इंद्रावती की सहायक नदियां है- भवरीडिंग, नारंगी, निबरा, कोटरी, गुडरा, गोईदर,भसकेली इत्यादि दक्षिण में इसकी सहायक नदियां है शंकनी, डंकिनी, चिंतावागु नंदीराज
उड़िसा के कालाहंडी में ही मुखीगुड़ा के पास अपर इंद्रावती हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बांध बनाया गया है जो एशिया का सबसे बड़ा बांध है।

इंद्रावती का महत्व

देउरगांव, मेटावाड़ा घाटलोहंगा, कालीपुर करंजी इत्यादि गांव जो नदी के नट पर बसे है यहां पूर्व तथा उत्तर पाषाण युगीन अवशेष प्राप्त हुए हैं

इतना ही नहीं इसके तट पर नल,गंग,नाग तथा काकतीय प्रतापी वंशों ने राज किया है इसलिए इसकी एतिहासिक महत्ता और भी अधिक बड़ जाती है।

नाग वंश के समय यह राज्य चक्रकोटय मंडल तथा मधुर मंडल के नाम से जाना जाता था जिनकी राजधानी करूसपाल तथा चित्रकोट जलप्रपात के समीप ही थी काकतीय वंश ने यहां 600 वर्ष से अधिक समय तक शासन किया इनके द्वारा स्थापित बारसूर, मधोता कुरूसपाल और जगदलपुर आज भी है

इनमें जगदलपुर नगर निगम बन चुका है। तथा पूरे क्षेत्र का व्यापारिक केन्द्र भी है।

जानिए जगदलपुर के बारे मेें

चित्रकोट के समीप बने 11 सदी का  नारायणपाल एतिहासिक महत्व का मंदिर है जिसे पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित किया है

इंद्रावती इस प्रकार आदि काल से समीप बसे लोगों के अजीविका का साधन बना है जिनमें मुरिया, माड़िया, गोड़, दोलना परधान दंडामी माड़िया  सूंडि कोष्ठा, केवट,राऊत, महार, तेलंग इत्यादि जनसमुदाय है।
चित्रकोट जलप्रपात के बाद बिंता से मचनार तक मगरमच्छ का प्राकृतिक रहवास है और इसी नदी में केकड़ा, कछुआ, जलीय सर्प आदि का भी  प्राकृतिक रहवास है

बीजापुर जिले में 2799 वर्ग किमी में नदी के किनार इंदिरावती राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना सन 1975 में की गई थी , तथा 1983 में
इसे प्रोजेक्ट टाईगर के अंतर्गत शामिल किया गया था जहां बंगाल टाईगर को संरक्षित किया जा रहा है।

इंद्रावती नदी के जल संसाधन के उपयोग हेतु उड़ीसा राज्य में खातीगुड़ा बाँध बनाया गया है। इसे सतत प्रवाहमान बनाये रखने, सिंचाई सुविधाओं के विकास, जलापूर्ति तथा भूजल स्तर को बनाये रखने के उद्देश्य से नगरनार से चित्रकोट तक नौ एनीकट (Anicut) का निर्माण किया गया है। यातायात सुविधाओं के विकास के लिये इंद्रावती नदी पर अनेक पुलों का निर्माण किया गया है।

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Author: adji

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