डायनोसाॅर के बारे में

डायनोसाॅर के बारे में जितना खोज हो चुका है और जितनी बातें कहीं जा रहीं उससे जानकार यही लगता है कि इस जीव के बारे में और भी जानना बाकि रह गया है। इसकी कौतूहलता का प्रमाण यह है िकइस पर हाॅलीबुड ने पूरी श्रंखला लेकर फिल्म भी बनाई जो दुनियां भर में काफी प्रसिद्ध हुई । हालांकि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं और जीव दोनों ही फिल्मकार की कल्पना और आधुनिक तकनीक का कमाल है परन्तु कई यह कई प्रश्न छोड़ जाता है । जिसे जानने की हर किसी की इच्छा है।
वैज्ञानिकों के लगातार अध्ययन और खोज का ही परिणाम है कि आज हम सैकड़ों वर्ष पूर्व जीवित रहें प्रणियों के बारे में जानकारी मिल रही है। । यह उन्हीं अध्ययनों का एक निचोड़ है ।

कहते है तिरासिक काल के दौरान जो आज से 230 मिलियन वर्ष था और जिस युग में पृथ्वी पर विशालकाय छिपकलियां जिसे अमेजिग रेप्टाईल कहते थे विचरण किया करते थे। एक तरह से पृथ्वी पर इनका ही राज था। और ये 65 मिलियनवर्ष पहले ही खत्म हो गये । हांलाकि इसके आकार के बारे में जो गणना की है वे प्राप्त हड्डियों और कंकालों के आधार पर ही हैं ।

वैज्ञानिक तथ्य

विलियम बकलैण्ड ने 1824 में ऐसे डायनोसाॅरस प्रजातियों के बारे में बताया जिसे मेगलोसाॅरस कहते थे इसका अर्थ होता है बड़ी छिपकली। और 1825 एक अन्य गिडोन मेन्टेल ने अन्य प्रजाति का पता लगाया जिसे ईगालाॅडाॅन कहते थे। वैसे इनका नामकरण डायनोसाॅर के नामकरण से पहले हुआ था।

डायनोसाॅर नाम कैसे पड़ा?

ब्रिटिश वैज्ञानिक 1841 में डायनोसाॅर का नाम ऐसे प्रजातियों के रखा और बाद में इसी नाम से डायनोसाॅर को जाना जाने लगा । डायनोसाॅर का शब्दिक अर्थ है बड़ी छिपकली । घर पर मौजूद किसी भी छिपकली को अगर हम कल्पना करें कि वे अपनी माजूदा आकार से हजार गुना बड़ी हो जाय तो सम्भवः डायनोसाॅर जैसे ही लगेगी।
फिलहाल डायनोसाॅर की 700 से अधिक प्रजाजियों का पता लगाया जा चुका है। वैज्ञानिकों की माने तो सभी विशालकाय नहीं होती थीं कुछ डायनोसाॅर की आकृति वर्तमान में पाये जाने वाले मुर्गे जितनी भी हुआ करती थीं ।

डायनोसाॅर का पूरा कंकाल
जर्मनी के बर्लिन में हम्बोल्ट म्यूजियम में रखी डायनोसाॅर का एक पूरा कंकाल देख कर उसके आकार का हम अंदाजा लगा सकते है। यह 22.3 मीटर लम्बी है जिसे वैज्ञानिकों ने ब्राकोई साॅरस का नाम दिया है। डायनोसाॅरस शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही प्रकार के होते थे ।
जाहिर है मांसाहारी डायनोसाॅरस काफी खूंखार रहे होंगें। एक नए प्रकार की डायनोसाॅरस की खोज चीन में हुई जो 9 मीटर लम्बा हुआ करता था। और यह अनुमानतः 160 मिलियन पहले पृथ्वी पर जीवित था। इसे गौनलौंग वीची कहा जाता है। यह एक प्रकार का टायराॅनासाॅर है।

उड़ने वाले डायनोसाॅर

कुछ डायनोसाॅर उड़ने वाले भी होते थे। जिनके पंख की लम्बाई 10.96 मीटर तक होती थी इसे पेटोराॅसाॅर कहा जाता है। खोजबीन में डायनोसाॅर के अंडे भी मिले है। जिनका आकार 25 से 30 सेमी तक होता था। ये हायपस्लोसाॅरस के अंडे थे। 70 किमी प्रतिघंटे की तेजी
डायनोसाॅर तेज दौड़ने वाले भी होते थे । ये वर्तमान में पाये जाने वाले शुर्तमुर्ग की रफतार में तेज दौड़ सकते थे इनकी स्पीड 70 किमी प्रतिघंटे होती है। 1985 मंे डायानोसाॅरस के अंडो की पपड़ी को अंतरिक्ष में भी ले जाया जा चुका है। ये काम अंतरिक्ष यात्री लोरेन एक्टाॅन ने किया था। और एक अन्य अंतरिक्ष यात्री बोनी डुनबर ने 1998 को डायनोसाॅर की हड्डी के साथ अंतरक्षि गए थे।

जीवित फाॅसिल

जीवाश्म वैज्ञानिकों ने डायनोसाॅरस युग में पाये जाने वाली बड़ी मछली को को लंदन और दक्षिण अफ्रीका के समुद्र की गहराईयों में पकड़ा ये घटना 22 दिसम्बर 1938 की है । कुछ पल जीवित रहने के बाद यह यह जीव मर गया। कैप्टन हैनरिक को लगा यह कोई आश्चर्य जनक जीव है जिसकी लम्बाई 1.7 मीटर है । जब वे इसे लेकर म्यूजिअम में गए तो पता चला यह प्रजाति 65 मीलियन वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवित पायी जाती थी । उसके बार 200 इसे अधिक प्रजाति इस क्षेत्र में पाये गये और उनमें से पकड़े जाने पर कोई भी जीवित नहीं बच सका। इसीलिए इसे जीवित फाॅसिल का नाम दिया गया और इसे कोलाकैन्थ कहा जाने लगा।

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Author: adji

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