Sarvangasana सर्वान्ग आसन

अब आईए बात करते है। सर्वान्ग आसन की । इस आसन को करने से पूरे शरीर का व्यायाम होता है इसीलिए इसे सर्वांग आसन कहते हैं।  आईए जानते हैं सर्वांग आसन कैसे करना चाहिए।
सबसे पहले सीधा पीठ के बल लेट जाएं और हाथों को कमर के पास सटाकर रखें ।
फिर सांस अंदर लेते हुए दोनों पैरो को अर्धहलासन की मुद्रा में उठा लें
कुहनियों को ज़मीन पर टिकाए हुए दोनों हाथों से पीठ को सहारा दें। इस मुद्रा में एक दो बार सांस अंदर बाहर लें । यह सुनिश्चित करे ले की आपके शरीर का संतुलन ठीक है या नहीं

इसके बाद धड़ व टांगों को उठाकर एक सीध में कर लें, इस प्रक्रिया में नज़र आपकी नाक पर होनी चाहिए। अगर ऐसा न हो सके तो नज़र आप नाभी पर भी रख सकते हैं।
अपनी क्षमता के अनुसार आप 60 से 300 सकेण्ड इस मुद्रा में रह सकते हैं । यानि हाथ कमर पर सहारे के तौर पर हो और सिर जमीन पर होते हुए धड़ का पूरा हिस्सा ऊपर उठा हुआ होना चाहिए।
फिर धीरे धीर पैरो को नीचे कर हाथों को कमर से हटा लिजिए और वापस पीठ के बल लेटे हुए उसी मुद्रा में आ जाईए जैसे आपने शरूआत की थी।
अगर शरीर को संतुलित करने में दिक्कत आ रही हो तो दीवार का सहारा ले सकते हैं। तथा गले में लचीलापन कम हो तो गर्दन के नीचे तौलिया या कोई मुलायम कपड़ा रख सकते हैं।
सावधानियां
दस्त, उच्चरक्तचाप, महावारी या गले में दर्द हो तो इसे न करें ।
शारीरिक क्षमता से अधिक इस योग को न करें
हो सके तो किसी योग प्रशिक्षक की देखरेख में इसे करें।
सर्वांग आसन के लाभ

कंधे गर्दन में खीचाव पैदा करता है
यह थाइराईड और हाईपोथेलमस ग्रंन्थियों को संतुलित करता है जिससे शरीर में उच्चे हार्मोंन्स का उत्पादन हो सके।
ह्दय व सांस की प्रणालियां को यह संतुलित करता है।
इस आसन से चेहरे पर खून का प्रवाह कम होने से झुर्रियां नहीं पड़ती है।
यह तनाव कम करता है और इससे अच्छी नींद आती है।

आसनों को करने का सही समय सुबह 5 से 7 बजे तक तथा शाम 6 से 8 बजे तक का समय उपयुक्त है । मगर ध्यान रखें कि आसनों को करने से पूर्व पेट साफ होना चाहिए यानि शौचक्रिया से निवृत होकर और भोजन के बाद योगासन करना चाहिए
आसन सही रीति से हो रहा है इसकी पहचान है कि आसन करने पर शरीर और मन में हल्कापन तथा खुशी महसूस होती है।
आसन करने के तुरंत बाद तेज हवा अथवा ठंड में नहीं निकलना चाहिए। यदि आसनों के बाद नहाना जरूरी हो तो कम से कम एक घंटे के बाद ही नहाना चाहिए।
आसनों को करने से पहले निम्न प्रकार की बैठने की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है।
सुबहः आप का चेहरा पूर्व की तरफ हो
शामः आपका चेहरा पश्चिम की तरफ हो
किसी भी समय: उत्तर की तरफ हो
वैसे तो आसन कभी भी किसी भी मौसम में किए जा सकते हैं परन्तु शरद ऋतु में आसनों को करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
शौच के बाद ही आसन करने चाहिए। नहाने का कोई बंधन नहीं है
आसनों करते समय अपनी क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। आसनों को करते समय शरीर पर ज्यादा जोर नहीं डाले ।
आसनों को करते समय आप तनाव मुक्त हों ।
किसी अनुभवी या योग प्रशिक्षक की देखरेख में आसनों को करना ज्यादा उपयोगी होता है।
आसन करने से पूर्व चाय,काफी या दूध ले सकते हैं । भरपेट भोजन करने के चार घंटे के बाद ही आसन करना चाहिए।
अगर आप खाली पेट आसन कर रहें हैं तो आसनों के आधे घंटे के बाद भोजन कर सकते हैं ।
आसनों को करने के पहले एक गिलास ताज़ा पानी पीना लाभ दायक है।
कठिन आसन सुबह और उत्तेजक आसन जैसे शीर्षासन, सर्वागासन और पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास शाम को करना लाभदायक होता है।
जहां आप आसन कर रहें हैं वह जगह खुली व हवादार होनी चाहिए। वहां शोरगुल न हों तथा आसनों को समतल ज़मीन पर करना चाहिए।
ये जानकारी प्रत्येक योग करने वाले को ध्यान मंे रखना चाहिए ।

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Author: adji

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