क्रिकेट के भगवान : सचिन तेंदुलकर

एक विचार सचिन तेंदुलकर पर
बालक सचिन

आज हम बात कर रहें है क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की यूूूं तो क्रिकेट की दुनिया में अनेकों बड़े-बड़े खिलाड़ी हुई है मगर शायद सचिन तेंदुलकर की तरह कोई आया है न आयेगा। सचिन तुदुलकर जन्म 23 अप्रेल 1973 को हुआ , 15 नवम्बर 1989 में 16 साल की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ अपना अपने खेल जीवन की शुरूआत की थी । तब से लेकर 2013 तक लगातार 24 साल किक्रट की दुनियां में अपना एक छत्र राज किया ।

क्रिकेट के भगवानः

क्रिकेट के लगभग सारे रिकार्ड चाहे वह वन-डे हो या टेस्ट सब अपने नाम किए है।तब उनके फैन ने उन्हें भगवान कहना शुरू कर दिया यानि जिसके पास सारी क्षमता या ताकत हो फिर भी उसमें घमंण्ड न हो,  सचिन ने जिस लगन और कर्मठता के साथ क्रिकेट  खेला है वह बहुत ही कम देखने को मिलता है। अगर हम सम्मान की बात करें तो सचिन को जो सम्मान मिला है वह बहुत ही कम खिलाड़ियों को मिला है। किक्रेट की दुनियां के आईकाॅन सर डाॅन ब्रेडमेन भी सचिन की बैटिंग के कायल थे। और उन्होंने स्वयं के जन्मदिन पर सचिन तेंदुलकर को अपने घर आमंत्रित किया था। और ये खबर ने बहुत ही सुर्खियां बटोरी थी। अगर आपको एक संपूर्ण क्रिकेट देखना है तो वह सचिन तेंदुलकर का खेल देखें ।

दुनियां में उनसे बेहतर क्रिकेटर नहीं हुआ है । अगर हम बात करें उनके पूरे क्रिकेट करिअर एक दम बेदाग रहा है। उनका नाम कभी किसी विवाद से नहीं जुड़ा है सचिन जिस समय अपने क्रिकेट के शिखर पर थे उस समय सचिन तेंदुलकर के बारे में लिखने के लिए शब्द कम पड़ जाते थे । इससे आप उनकी शख्सयित का अंदाजा लगा सकते है।

क्यों कहलाते है सचिन क्रिकेट के भगवानः

एक समय ऐसा भी आया जब दुनियां का नम्बर वन स्पीनर शेन वाॅन ने तो यहां तक कह दिया था। कि मुझे सपने में भी सचिन तेंदुलकर आते है और मेरे गेंदों की धुनाई करते है। ये समाचार ने भी क्रिकेट की दुनियां में  काफी सुर्खियां बटोरी थी । इस बात से आप अंदाजा लगा सकते है कि सचिन का कितना खौफ था। दुनियां की सारी टीमों की भारत के खिलाफ एक ही रण नीति होती थी कि सचिन तेंदुलकर को आउट कर दो तो भारतीय टीम आउट हो जाती है। अगर बात करें उनकी फेन फालोविंग की तो अमिताभ बच्चन और लता मंगेशकर से लेकर इंग्लैण्ड के प्रधान मंत्री भी सचिन के फेन रह चुके है। अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों का तो ये हाल था कि सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी के समय अपनी फिल्मों की शूटिंग तक रूकवा देते थे। 90 के दशक में जब सचिन तेंदुलकर अपने पूरे शबाब पर थे उस समय उनकी बल्लेबाजी देखने के लिए रोड सुनसान हो जाता था । क्योंकि लोग उनकी बल्लेबाजी देखने के लिए लोग टीवी से चिपके रहते थे। 70 -80 के दशक में जो क्रिकेट खेला जाता था। उसको बदलने में सचिन तेंदुलकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सचिन ने जिस तरह से बल्लेबाजी की है ,उससे क्रिकेट में काफी परिवर्तन आया है। एक समय ऐसा था कि अंतरराष्ट्रीय  क्रिकेट में कोई खिलाड़ी अकेला सौ शतक बना लेगा ऐसी कल्पना करना भी मुश्किल बात थी। लेकिन सचिन तेंदुलकर ने इसे सच कर दिया । सचिन तेंदुलकर ने जिस एकाग्रता और सर्मपण के साथ क्रिकेट जो योगदान दिया है उसे क्रिकेट का इतिहास हमेशा याद रखेगा । और शायद इसी कारण से उनके रिटायरमेंट वाले दिन भारत का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार भारत रत्न देने की घोषणा की थी ।
क्रिकेट में उनके योगदान को देखते हुए पहली भारत सरकार ने खेल के क्षेत्र में भारत रत्न पुरस्कार किसी खिलाड़ी को दिया। ये अपने आपमें एक इतिहास है ।

सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट में कई इतिहास रचे है उनमें से एक ये भी दर्ज हो गया है।14 नवम्बर 2013 को वेस्ट इंडिज के साथ टेस्ट पारी खेलते हुए उन्होंने अपने टेस्ट क्रिकेट से सन्यास ले लिया 

 

सचिन तेंदुलकर ने जो क्रिकेट को नई उचाईयों पर पहूॅचाया है और क्रिकेट के प्रति जोश ,जुनुन सर्मपण के कारण ही उन्हें क्रिकेट का भगवान कहा गया है।

 

 

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Author: adji

2 thoughts on “क्रिकेट के भगवान : सचिन तेंदुलकर

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