Project Tiger

अजीब बात है कि शेर जैसा ताकतवर और खूंखार जानवर का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर पहॅुच चुका है। पूरी दुनियां में प्रोजेक्ट टाईगर यानि वल्र्ड वाईल्ड लाईफ फंड के जरिए शेरों को बचाने की कोशिश की जा रही है। भारत में यह कोशिश प्रोजेक्ट टाईगर कहलाता है। इसकी शुरूआत 7 अप्रेल 1973 में सेे हुई । 13 फीट का बाध 300 किलो तक वजन हो सकता है। यह भारत का राष्ट्रीय पशु है। तथा इसका वैज्ञानिक नाम पैंथरा टिग्रिस है। भारत के अलावा टाईगर नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान, और इंडोनेशिया में पाया जाता है।


किस प्रकार के क्षेत्र इसे पसंद है?

इस घास के मैदानी इलाकों में रहना पसंद है। इसके अलावा यह जंगलों में तथा दलदली क्षेत्रों में भी मिलता । यह बड़ी ही एकाग्रता से शिकार करता है तथा यह शिकार के पीछे काफी तेज दौड़ सकता है। यह अपने शिकार को पीछे से हमला करता है । अक्सर यह दबे पांव अपने शिकार के नजदीक आता है और झटके से हमला करता है।
यह मनुष्यों द्वारा पाले गए पशुओं को खाता था इसके अलावा इसका मुख्य भोजन हिरण, चीतल, सांभर जंगली भैस है। इंसान अपने स्वार्थ के लिए इसे मारना शरू कर दिया और इसका खत्मा इस प्रकार हो गया कि पूरी दुनियां में इसकी संख्या महज 6000 तक पहूॅॅच चुकी है उनमें से 4000 बाघ अकेले भारत में है। यानि पूरी दुनियां में इस हिसाब से केवल 2000 ही बाघ हैं । एक समय चीन में बाघों की संख्या सर्वाधिक थी मगर आज यह बिलकुल नहीं है। बाघ की कुल नौ प्रजातियां होती थी जिनमें तीन प्रजातियों को इंसानों ने पूरी तरह से खत्म कर दिया। इसके पूरे शरीर पर काले रंग की पट्टी होती है और पेट तथा वक्ष के भीतरी भाग एवं पाव सफेद रंग के होते हैं।
इसकी आयु 19 वर्ष की होती है। यह अकेले रहना पसंद करता है , केवल प्रजनन काल में नर एवं मादा मिलते है। और एक बार में दो या तीन शावक जन्म लेते हैं और बाघ पैदा होने के बाद महज ढाई वर्ष के बाद अलग रहने लगते है।
हाल ही में मिले बाघ की विलुप्त उपप्रजाति के अध्ययन से पता चला है कि बाघ भारत में चीन से आए है और जिस रास्ते से वे भारत आए उन्हें शताब्दियों बाद सिल्क रूट कहा जाने लगा। अध्ययनों के मुताबिक एशिया के कैस्पियन और रूस के साईबेरियन बाघ की संरचना एक सी होती है।
प्रोजेक्ट टाईगर केन्द्र सरकार की योजना है जिसका एक हिस्सा बस्तर जिले के बीजापुर मंे भी है और यह 2799 किमी के दायरे में फैला है।

एक उपलब्धि

बाघों की गिनती भी हर चार सालों में की जाती है इसके मुताबिक इस परियोजनात्र्गत 2006 में इनकी संख्या जहां 1411 थी वह 2010 को 1701 हो गई फिर 2014 में इनकी संख्या 2226 हो चुकी थी।

प्रोजेक्ट टाईगर का काम


राष्ट्रीय उद्यान जैसे बांधवगढ़ ,कान्हा, और सुन्दर बन में बाघों को संरक्षित किया गया।
ऐसे परिवार जो बाघ बाहुल्य जंगलों से गुजारा करते थे उनके लिए रोजगार की अलग से व्यवस्था की गई ताकि वे बाघों के कोप से बचे और वे बाघों को नुकसान न पहॅुचा सके। इसे परिवारों के पुर्नवास की भी व्यवस्था की गई।
टाईगर के स्पर्म को सुरक्षित रखा गया ताकि बाघों का क्रित्रिम गर्भाधान हो सके।

टाईगर रिर्जव वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की तैनात किया गया। सेवानिवृत सेना के आफसरों की एक विशेष टीम को टाईगर रिर्जव की देखरेख का काम सौंपा गया।
पशु सुरक्षा अधिनियम को सख्त बनाया गया । जिसके तहत जो भी शिकार करता पाया गया तो उस पर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की गई तथा। हाथियारों को जब्त किया गया। इस तरह गैर कानूनी शिकार पर रोक लगाई गई।
मध्यप्रदेश तथा कर्नाटक को टाईगर राज्य घोषित किया गया।
पड़ौसी देशो जैसे चीन और नेपाल से किसी भी प्रकार के जंगली जानवरों की उत्पाद या अंगों के लेन देन पर रोक हो सके इस संबध में समझौते किये गये। जिससे बाघ व अन्य जानवरों की खाल,मांस व अन्य आवागमन रूक गया और इससे गैरकानूनी शिकार रूक गया।
एक विश्वस्तरीय फोरम बनाया गया जिससे दुनियां के अन्य देशों मंे भी बाघों को लेकर जागरूकता आई।
इस तरह बाघों के संरक्षण सर्वधन के लिए टाइगर रिर्जव का कार्य सराहनीय है।

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Author: adji

2 thoughts on “Project Tiger

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