Know Pre-Primary Education

बच्चो के स्कूल जाने से पूर्व

नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत हमारे यहां अप्रेल की पहली तारीख से हो जाती है । पालक- अभिभावक शैक्षणिक सत्र की शुरूआत से ही अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई अच्छी हो सके इसके लिए बेहतरीन स्कूलों की तलाश में लगे होते है। हम यहां खास तौर पर ऐसे पालकों की बात कर रहें है जिनके बच्चें पहली बार स्कूल जाने के लिए तैयार हैं या हो रहें है इसके लिए हम प्री प्राईमरी कक्षा संचालित करने वाले स्कूलों की बात करते है । जिसके अंतर्गत ऐसे स्कूल आते है जो प्री-नर्सरी, नर्सरी, एलकेजी या यूकेजी की कक्षाएं संचालित करते है। और ऐसे बच्चों की उम्र एक से लेकर पांच साल तक की होती है।

प्राईमरी शिक्षा का महत्व

यह किसी भी बच्चे की शैक्षणिक विकास की पहली सीढ़ी होती है और जानकार बताते हैं कि अगर यह सीढ़ी ही कमजोर होगी तो बच्चे का पूरा शैक्षणिक कार्यकाल गड़बड़ा जाएगा। इसे दुरस्त करने के लिए पालक अभिभावक ऐसे स्कूलों को खोज में लग जाते है जहां पर बच्चे की पढ़ाई लिखाई के साथ उसका मन भी स्कूल में लगे। यह जरूरी है कि क्योंकि सत्र के शुरूआत में रोते बिलखते स्कूल जाने को अनिच्छुक बच्चों की तदाद काफी देखने में मिलती है। और वे सभी स्कूल के नाम से कतराते हैं , आखिर क्यों, क्या आप चाहते है आपको बच्चा स्कूल जाए तो स्वतः ही तैयार हो जाए या फिर स्कूल जाने में रूचि दिखाए तो आईए चर्चा करते है कि आप कैसे स्कूल का चुनाव करें ?

आपको अपने बच्चे को स्कूल में दाखिले से पूर्व क्या तैयारी करनी चाहिए ?

जानते हैं इसके बारे में  सबसे पहले तो जहां आप अपने बच्चे को अपने से दूर पहली बार रख रहें है, उसमें उसकी खासियत के बारे में जानकारी हासिल करना होगा। प्री प्राईमरी शिक्षा के माप दंडों के अनुसार कुछ शर्ते है जिन्हें प्रत्येक स्कूल को पूरा करना होता है , तो पता करते है वे क्या हैं

कैसा हो आपके बच्चे का स्कूल?

ये सबसे अहम सवाल है क्योंकि स्कूल का मतलब बड़ी बिल्डंग नहीं होता है – इस बात से आप तो सहमत होंगे ही मगर इसके अलावा निम्नलिखित खूबियां तो जरूरी देखिए।

1. सुरक्षा एवं एक दमदार छवि

पहली खासियत स्कूल की यही हो तो ज्यादा अच्छा है, यानि स्कूल में आपका बच्चा कितना सुरक्षित है ये ज्यादा मायने रखता है । इसकी जानकारी आपको स्कूल के अभिभावक से अच्छी तरह मिल सकती है। आखिर आपके बच्चे का सवाल है। अक्सर देखने में आता है कि बड़ी -बड़ी बिल्डंग्स होने के बावजूद भी वहां पर बच्चे की सुरक्षा का कोई इंतेजाम नहीं होता है।

सुरक्षा में देखना क्या होगा?
इसमें क्या स्कूल प्रबंधन बच्चों को ले जाने और लाने में क्या सावधानियां बरतता है ?

और स्कूल का ढांचा इस प्रकार बना है बच्चे आप बच्चे के लिए सुरक्षित महसूस करते है?

खेलकूद की गतिविधयां के वक्त बच्चे को चोट लग जाए तो चिकित्सकीय व्यवस्था ठीक है ?

क्या मेडिकल चेक अप और देखभाल प्रशिक्षित डाॅक्टर्स या नर्स करते हैं ?

क्या बच्चे से मिलने क लिए सिर्फ मातापिता को स्कूल इजा़जत देता है?

क्या मातापिता,पालक अभिभावक का रिकार्ड भी स्कूल रखता है?

क्या बच्चे की मेडिकल इतिहास (medical history) की जानकारी स्कूल रखता है?

अगर उपरोक्त सवालों के जवाब में आपको हां मिलें तो ठीक है।

आजकल तो सोशल मिडिया का ज़माना है लोग अखबारों से ज्यादा साशल मिडिया पर ज्यादा यकीन करते है।
अगर किसी स्कूल के बारे में आपको पता लगाना हो तो निम्न प्रश्न उस स्कूल में पढ़ने वाले पालकों से कर सकते है।

क्या आपको बच्चा खुशी-खुशी स्कूल जाता है? 1. नहीं 2. हां
स्कूल पालक अभिभावकों से किस प्रकार संवाद करता है 1.फोन पर , 2. लिखित में या मिलकर।
पढ़ई का माध्यम 1. किताबी  है या 2. खेल कूद है  ?

जवाब 2 बच्चों के लिए ज्यादा उपयुक्त है । अनुसंधान बताते हैं कि बच्चे बंधे वातावारण में पढ़ने के बजाए मुक्त वातावरण में ज्यादा अच्छा समझते है  आप अपने विश्वसनीय पालाकों या अभिभावकों से मिलकर सवालों के जवाब पा सकते हैं । संतुष्ट हों तभी आगे आईए।  प्री प्राईमरी एजुकेशन में क्या देखा जाए प्री प्राईमरी शिक्षक की विशेषताएं प्री प्राईमरी शिक्षा के के बारे में

2. आरामदायक वतावरण हो।

ये बेहद जरूरी है आपके बच्चे के स्कूल में एक स्वस्थ्य आरामदायक वातावरण हों

न कि डर व खौफ का वातावरण । प्री प्राईमरी स्कूल के बच्चे पहली बार मातापिता एवं घर के स्नेही निकलकर बाहर की दुनियां में आते है । जाहिर है उन्हें अगर स्नेही वातावरण स्कूल में नहीं मिलेगा तो वे स्कूल जाने से कतराएंगे।
इस बात का पता लगाने के लिए आपको स्कूल में विजिट करना होगा खासतौर पर उस वक़्त जब स्कूल लग चल रहा है। फिर बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर्स से मिलना होगा ताकि ये पता लगाया जा सके कि बच्चे के प्रति उनका व्यवहार दोस्ताना है या नहीं। मगर दुर्भाग्य यह है इस क्षेत्र में संचालित किसी भी स्कूल में क्लास रूम के दौरान पालकों और अभिभावकों को मिलने की इजाजत नहीं दी जाती – जो सर्वथा गलत है इसका विरोध जरूर होना चाहिए।

3. बढ़िया टीचिंग स्टाफः-

प्री प्राईमरी प्रत्येक टीचिंग स्टाफ में ये गुण तो अवश्य होने चाहिए,

Sense of Humor  यानि हास्य वृत्ति
Creativity यानि रचनात्मकता यानि कुछ नया करने का जोश
लचीना पन,
दोस्ताना व्यवहार
दमदार व्यक्तित्व

टीचर्स से जब आप मिलें तो ये सवाल जरूर पूछे

कैसा लग रहा है पढ़ाने में बच्चों को ?
कब से पढ़ा रहें है आप? क्या बच्चे आपकी सुनते है?

वगैरह जवाब सकारात्मक नहीं आया तो समझ लिजिए आपके बच्चे के लिए ठीक नहीं है। मगर unfortunately,  प्रवेश की सारी प्रक्रिया होने के बाद ही टीचर्स से मिलने की इजाजत मिलती है जो कि गलत है । पर इसका पता शोसल मिडिया से लगाया जा सकता है।
ध्यान रखिए बच्चा आपका है स्कूल का नहीं और सही गलत का फैसला स्कूल पालक ही को करना चाहिए।

छ.ग. सरकार स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक जगदलपुर में 224 प्राईमरी स्कूल चल रहें है। और 124 उच्च प्राईमर स्कूल संचालित हैं । सर्वे में ये चैकाने वाले तथ्य निकल कर आयें है और यह र्दुभाग्य है कि शहर के उच्च प्रतिष्ठित स्कूलों में नर्सरी से पढ़ने वाले बच्चों को भी बेसिक ज्ञान की बहुत कमी है। यानि जब वे 15 साल की उम्र में आ चुके थे तब उनके ज्ञान का स्तर परखा गया तो 75 बच्चे ऐसे निकले जिन्हें विषय का बुनियादी ज्ञान की कमी थी।  सरकारी स्कूलों का स्तर तो और भी बुरा निकला

जगदपुर के कुछ चर्चित स्कूलों के नाम हम यहां दे रहें है,

आदेश्वर अकादमी हल्बाकचोरा
आदेश्वर पब्लिक स्कूल खमार गांव
बचपन प्ले स्कूल
बाल बिहार हायर सेकेण्ड्री स्कूल
ड्रीम इंडिया
ज्ञानोदय स्कूल आडावाल
जवाहर नवोदय विद्यालय
केन्द्रीय विद्यालय

माउन्ट लिटेरा जी़ स्कूल
द लिटिल एंजल्स एकैडमी
निर्मल हायर सकेण्ड्री स्कूल
सक्सेस काॅन्वेंट
संस्कार द गुरूकुल चेडईपदर
संस्कार द स्र्माट स्कूल
विद्या ज्योति स्कूल
भगत सिंह स्कूल

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Author: adji

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