कैसे बदले है देश के नाम ?

कैसे बदले है देश के नाम ?

भारत में हाल ही में कुछ शहरों के नाम बदले गए। और इसे लेकर कई प्रकार की बातें की गई। आज जानते हैं उन देशों के बारे में जिन्होंने अपने नाम बदले हैं।

ईरानः– ईरान का पुराना नाम पर्शिया हुआ करता था। 1935 मंे वहां की सरकार ने सभी देशों से कहा कि अब उसे पर्शिया की बजाय ईरान कहा जाए । हालांकि कुछ अलोचकों ने इसे अनुचित कहा । और इसकी जमकर आलोचना की ।और 1979 में हुए ईस्लामिक कां्रति के बाद इसे इसे ईस्लामिक रिपब्लिक आॅफ ईरान कहा गया ।

बस्तरिया बियर

यह एक प्रकार का मादक पेय है जिसे आम भाषा में ताड़ी भी कहते है आदिवासियों जीवन में सल्फी मादक पेय ही नहीं बल्कि सामाजिकता का प्रतीक भी है जानते है क्या खूबियां है इस पेय में

इस कारण से चित्रकोट जलप्रपात सूख गया

जानिए क्या कारण है चित्रकोट जल प्रपात सूख गया है चंद दिनांे में ही चित्रकोट में पानी देखने को
मिला ठीक वैसे ही जैसे यह आमतौर पर देखने को मिलता है। बस्तर के नियाग्रा फाल समझे जाने वाले इस चित्रकोट
जलप्रपात में हर साल काफी संख्या में पर्यटक आते है । इस बार पर्यटकों के साथ पर्यावरण प्रेमी भी चित्रकोट फाॅल के
इस रूप पर अचंभित थे जानिए क्या है वें
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जानिए क्या कारण है चित्रकोट जल प्रपात सूख गया है चंद दिनांे में ही चित्रकोट में पानी देखने को
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जलप्रपात में हर साल काफी संख्या में पर्यटक आते है । इस बार पर्यटकों के साथ पर्यावरण प्रेमी भी चित्रकोट फाॅल के
इस रूप पर अचंभित थे जानिए क्या है वें

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कंबोडिया:-

कंबोडिया ने कई बार अपने देश का नाम बदला है 1953 से 1970 के बीच इसे किंगडम आॅफ कंबोडिया कहा जाता था । 1970 से से 1975 तक इसका नाम खमेर था। जब देश मेें फिर से राजशाही बहाल हुई तो इसका नाम पुनः किंगडम आॅफ कंबोडिया किया गया। यहां के निवासी खुद को कम्पुचिया कहलाना पंसद करते है।
म्यांमार :

म्यांमार को पहले बर्मा कहा जाता थां सैन्य सरकार ने 1989 में देश का नाम म्यांमार रखा। फ्रांस, जापान और संयुक्त राष्ट्र ने इस नाम को स्वीकार भी किया। लेकिन ब्रिटेन और अमेरिका लम्बे समय तक इसे बर्मा के नाम से ही स्वीकार करते रहे। लेकिन अब सैन्य सरकार खत्म होने के बाद से म्यांमार को लकर विश्व समुदाय की सोच बदल रही है।
जार्डन
मध्य पूर्व का देश जाॅर्डन जब ब्रिटेन के अधीन था तो उसका नाम ट्रांसजार्डन था। 1946 में आजादी के बाद 1949 में देश का नाम द हाशेमिते किगडम आफ जार्डन किया गया। जाॅर्डन एक नदी का नाम है माना जाता है कि सइी नदी में ईसा मसीह का बपतिस्मा हुआ था।
इथोपिया
मौजूदा इथोपिया के उत्तरी हिस्से पर पहले अबीसीनिया सामा्रज्य का शासन था, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान राजा हेले सेलासी ने देश का नाम अबीसीनिया से इथोपिया कर दयिा । हालांकि कुछ जानकारों का मत है कि इथोपिया का नाम हमेशा से ही यही था और अबीसीनिया नाम को अरबों ने प्रचलित किया।
बोत्सावाना
मार्च 1885 में ब्रिटेन ने बोत्सावाना को आधिकारिक तौर पर अपना उपनिवेश बनाया था। और इसी के साथ उसका नाम बेचुयानालैंड हो गया था । लेकिन 30 सितम्बर 1966 को यह देश आजाद हुआ। इसका नाम बोत्सावाना रखा गया। यह नाम देश के बससे बड़े जातीय समूह त्वाना के नाम पर रखा गया।
कांगो
जिस देश को आज हम संक्षिप्त में डीआरसी के नाम से जानते हैं उसने 1960 में रिपब्लिक आॅफ कांगो के नाम से आजादी पायी थी 1965 में यह डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आॅफ कांगों हो गया लेकिन 1971 में राष्ट्रपति मोबुतु सेसे सोको ने उसे रिपब्लिक आॅफ जायरे नाम दिया । 1997 में मोबुतु के निधन के बाद देश फिर से डेमोके्रटिक रिपब्लिक आॅफ कांगो हो गया।
श्रीलका
1815 से लेकर 1948 तक अंग्रेजों के समय में इसे सीलोन कहा जाता था। बाद में आजादी की लड़ाई के जोर पकड़ने से इसे श्रीलंका नाम दिये जाने की मांग ने जोर पकड़ा । 1972 में इसका नाम बकायदा रिपब्लिक आॅफ श्रीलंका रखा गया जो 1978 में डेमोके्रटिक रिपब्लिक आॅफ श्रीलंका हो गया ।
बेनिन
पश्चिमी अफ्रीका के जिस इलाके में आज बेनिन रिपब्लिक है, वहंा औपनिवेश काल में दाहो राज्य हुआ करता था। इस राज्य में आज के टोगो और नाईजीरिया का दक्षिण पश्चिम हिस्सा भी शामिल था। 1975 में आजादी मिलने के 15 साल बाद इसका नाम बेनिन रखा गया।
बुरकीनो फासो
पहले उपर वोल्टा कहे जाने वाले इस पश्चिमी अफ्रीकी देश का नाम अगस्त 1984 में राष्ट्रपति थाॅमस संकारा ने बुरकीना फासों रखा । यह नाम यहां बोली जाने वाली दो प्रमुख भाषाओं के नाम पर था। बुरकीना का मतलब होता है ईमानदार लोग और फाॅसो को द्युला भाषा में पितृभूमि कहते हैं ।
इस प्रकार नामों के चलन में समय और परिस्थिति का बड़ा ही योगदान रहता है
कहते है भारत के नाम के साथ भी कुछ कहानियां जुड़ी हुई है । सिन्धु नदी के किनारे बसने के कारण पहले इस देश को सिन्धु कहा जाने लगा था बाद में विदेशियों के आगमन ने सिन्धु के उच्चारण को ‘‘हिन्दु’’ कहा जाने लगा चुंकि यहां हिन्दुओं की आबादी ज्यादा रही , सम्भवतः इसीलिए हिन्दुस्तान कहा जाने लगा। यानि ‘‘हिन्दुओं का स्थान’’

adji

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