डिजिटल सिग्नेचर के बारे में

जिस प्रकार से कागज़ पर किये गए हस्ताक्षर इस बात का प्रमाण होते है | कि इस पृष्ठ पर लिखी गयी सभी बातें हमारी जानकारी में हैं | अथवा हम इससे सहमत हैं , या नहीं | ठीक उसी प्रकार डिजिटल सिग्नेचर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया गया एक हस्ताक्षर होता है | जो हमारी सहमति को प्रदर्शित करता है | यह एक अलग तकनीक से बनाया गया एक डिजिटल हस्ताक्षर होता है | जिसे प्रयोग करने हेतु आवश्यक जानकारी जैसे पासवर्ड सिर्फ उस व्यक्ति को होती है | जिसके यह डिजिटल हस्ताक्षर हैं | कोई अन्य व्यक्ति जिसे इस पासवर्ड की जानकारी नहीं है | वह आपके डिजिटल हस्ताक्षर नहीं कर सकता है |

 

Digital Signature कैसे काम करता है

डिजिटल सिग्नेचर हर उपभोक्ता के लिए बिलकुल ही अलग और अपने जैसा अकेला होता है | यह एक खास कंप्यूटर अल्गोरिथम पर कार्य करता है | जिसे कहते हैं | पी.के.आई. (पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर ) Digital Signature की सुविधा प्रदान करने वाली संस्था इसी कंप्यूटर अल्गोरिथम का उपयोग करके दो या दो से अधिक कोड बनाती है | जिसे की(key) कहते हैं | इन दो कोड (की) में से एक पब्लिक की(key)होती है | और एक प्राइवेट अथवा निजी की(key) होती है | इसमें से पब्लिक की(key) सार्वजनिक होती है | और प्राइवेट अथवा निजी की(key) गोपनीय होती है | जिसे केवल उपभोक्ता जानता है | जब कभी भी उपभोक्ता कही पर डिजिटल सिग्नेचर करता है | तो वह इसी प्राइवेट की(key) का उपयोग करता है |

डिजिटल सिग्नेचर एक मैथमेटिकल तकनीक है जो मैसेज, सॉफ्टवेयर या डिजिटल डॉक्यूमेंट की ऑथेंटिसिटी और इंटीग्रिटी को वैलिडेट करता है।

Digital Signature हाथ से लिखा हुआ सिग्नेचर या स्‍टेम्‍प सील के बराबर  होता हैं, लेकिन यह डिजिटल कम्युनिकेशन्स में छेड़छाड़ और प्रतिरूपण की समस्या को हल करता है।

Digital Signature इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट, ट्रैन्ज़ैक्शन या मैसेज के ओरिजिन, पहचान और स्थिति के प्रमाण का अतिरिक्त आश्वासन प्रदान करता हैं, साथ ही साइनर (हस्ताक्षरकर्ता) द्वारा सूचित सहमति स्वीकार कर सकते हैं।

भारत सहित कई देशों में, हाथ से साइन किए डॉक्यूमेंट जितना ही डिजिटल सिग्नेचर का कानूनी महत्व है।

डिजिटल सिग्नेचर एक क्रिप्टोग्राफिक वैल्‍यू है जो डेटा से कैलकुलेट की जाती है और एक सिक्रेट Keys जिसे केवल साइनर (हस्ताक्षरकर्ता) द्वारा ही जाना जाता है।

पहला है क्लास 1 डिजिटल सिग्नेचर-

इसके अंतर्गत Digital Signature करने वाले व्यक्ति की पहचान अथवा वैधता उसके ईमेल अकाउंट की सहायता से की जाती है |

दूसरा है क्लास 2 डिजिटल सिग्नेचर-

इसके अंतर्गत डिजिटल सिग्नेचर की सुविधा प्रदान करने वाली संस्था यह सुनिश्चित करती है | आपके द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाली रिपोर्ट अथवा डॉक्यूमेंट सही है | और आप उसकी स्वीकृति दे रहे है | और इसके गलत पाए जाने की जिम्मेदारी आपकी होगी | इसे कोई भी आम व्यक्ति अथवा किसी बिज़नेस कंपनी द्वारा उपयोग किया जाता है |

तीसरा है क्लास 3 डिजिटल सिग्नेचर

इस श्रेणी का डिजिटल सिग्नेचर सबसे सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है | क्यूंकि इस श्रेणी का Digital Signature ,डिजिटल सिग्नेचर प्रदान करने वाली संस्था द्वारा सीधे जारी किया जाता है | और इसे प्राप्त करने हेतु उपभोक्ता को व्यक्तिगत रूप से डिजिटल सिग्नेचर की सुविधा प्रदान करने वाली संस्था के समक्ष प्रस्तुत होना पड़ता है | बिना व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत हुए संस्था आपको यह सुविधा प्रदान नहीं करेगी | और आप इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे |

उपरोक्त तीनों डिजिटल सिग्नेचर की सुविधाओं में से क्लास 1 की डिजिटल सिग्नेचर सबसे हल्की और सुरक्षा और गोपनीयता के लिहाज़ से सबसे कमजोर Digital Signature मानी जाती है | वही क्लास 3 की डिजिटल सिग्नेचर सुविधा सबसे अच्छी और साथ ही साथ सुरक्षा व गोपनीयता के मद्देनजर भी बहुत मजबूत और सशक्त मानी जाती है |

Digital Signature Certificate (DSC) 

यह एक डिजिटल माध्यम से बना और प्रदान किया गया एक डिजिटल सर्टिफिकेट होता है | जो उपभोक्ता को डिजिटल सिग्नेचर की सेवा प्रदान करनी वाली संस्था द्वारा जारी किया जाता है | इस सर्टिफिकेट में उपभोक्ता के नाम, ईमेल एड्रेस , निवास स्थान का पता ,पिनकोड, देश,राज्य और यह सर्टिफिकेट कब जारी किया गया किसके द्वारा जारी किया गया और इसकी वैधता कबतक है | यह सारी जानकारी इसमें समाहित होती है |

डिजिटल सिग्नेचर का महत्व-

आज के परिवेश में जहां सबकुछ डिजिटल होता जा रहा है | और कागज़ी कार्यवाही को काम से काम करने पर जोर दिया जा रहा है | इस स्थिति में डिजिटल सिग्नेचर का महत्व और भी बढ़ जाता है | आज सरकारी कार्यो का टेंडर हो या घर के खरीदारी, आयकर रीटर्न भरना कंपनी का पंजीकरण करना हो सभी कार्य डिजिटल होते जा रहे हैं | और ऑनलाइन इंटरनेट की सहायता से भरे जा रहे हैं | ऐसी परिस्थिति में Digital Signature का इस्तेमाल जोरो शोरों पर है | किसी भी कार्य हेतु कागज़ो को अटेस्ट करने का काम ,ऑनलाइन फॉर्म भरने का कार्य ऑनलाइन जी.एस.टी. भरना हो और अनेको कार्य डिजिटल सिग्नेचर की सहायता से घर बैठे अथवा अपने कार्यस्थल पर बैठे बैठे बड़ी ही सरलता से किया जा सकता है |

डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट की मान्यता-

इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के अनुसार Digital Signature सम्पूर्ण भारत में मान्य है | और इन्हे इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री द्वारा लाइसेंस प्राप्त अधिकारियो अथवा संस्थाओ द्वारा ही जारी किया जा सकता है | इस डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट की एक जारी करने की तिथि और वैधता समाप्त होने की तिथि भी होती है | जो इस डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट पर अंकित की जाती है |

Digital Signature Certificate (DSC) की आवश्यकता कहां पर होती हैं

Digital Signature Certificate (DSC)  की आवश्यकता आपको निम्नलिखित स्थानों पर पड़ सकती है –

  • इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करने के लिए |
  • कंपनी इनकॉर्पोशन के ई फाइल करने के लिए |
  • चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सेक्रेटरी और कॉस्ट एकाउंटेंट द्वारा ई E-Attestation के लिए |
  • गवर्नमेंट टेंडर के फाइल करने के लिए |
  • ट्रेडमार्क और कॉपीराइट ऐप्‍लीकेशन के फाइल करने के लिए |
  • एग्रीमेंट और कौन्‍ट्रैंक्‍ट के ई-साइन करने के लिए |

Digital Signature Kaise Banaye –

Digital Signature बनवाने के लिए शुरुआत में आप को एक डिजिटल प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है | ध्यान रहे को डिजिटल सिग्नेचर को पूर्ण रूप से सर्टिफिकेट अथॉरिटी द्वारा ही प्रोवाइड किया जाता है | जिस को ca के नाम से जाना जाता है | जिसे इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के सेक्शन 24 के अंतर्गत Digital Signature जारी करने की सरकार द्वारा मान्यता व लाइसेंस प्राप्त हो। CA डिजिटल सर्टिफिकेट को जरनेट करने के उपरांत उसे डिजिटल सिग्नेचर बनाकर आपको आपका सिग्नेचर दे देता है |

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डिजिटल सिग्नेचर की सुविधा प्रदान करने वाली संस्था की सेवा प्रदान करने हेतु ली जाने वाली रकम या फीस अलग अलग संस्थाओ के लिए अलग अलग हो सकती है | इसके द्वारा जारी किए गए Digital Signature की वैधता एक वर्ष अथवा दो वर्ष तक की होती है | इन संस्थाओं से डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट प्राप्त करने में सामान्यतः एक सप्ताह का समय लगता है |

Digital Signature के फायदे

डिजिटल सिग्नेचर से किसी भी पेपर अथवा दस्तावेज़ जो की प्रस्तुत किया जा रहा है | उसकी वैधता जाँची जा सकती है | कि यह सही है अथवा गलत |

Digital Signature की एक खास बात यह है | कि एक बार यदि किसी डॉक्यूमेंट या दस्तावेज़ पर आपने अपने डिजिटल सिग्नेचर कर दिए तो इसके उपरांत उस दस्तावेज़ को बदला नहीं जा सकता है | और न ही उसके साथ किसी प्रकार की छेड़खानी की जा सकती है | यदि ऐसा होता है | तो डिजिटल सिग्नेचर मान्य नहीं होगा | और सिस्टम उसे स्वीकार नहीं करेगा | इस सुविधा के कारण दस्तवेजो की नकल से बचा जा सकता है |

डिजिटल सिग्नेचर करने हेतु प्राइवेट की(key) केवल उपभोक्ता को ही मालूम होती है | इसलिए उपभोक्ता अपने द्वारा डिजिटल साइन किये गए किसी भी दस्तावेज़ को भविष्य में झुठला नहीं सकता हैं |

डिजिटल सिग्नेचर फीस

आमतौर पर क्लास 2 इंडिविजुअल डिजिटल सिग्नेचर की फीस  899 रुपये (वैलिड एक साल) , इसी तरह क्लास 3 इंडिविजुअल डिजिटल सिग्नेचर की फीस 1,999 रुपये (वैलिड एक साल) और DGFT/DSC डिजिटल सिग्नेचर की फीस 2,499 रुपये एक साल के लिए होती है |

दोस्तों, इस लेख के माध्यम से आप को Digital Signature से जुड़ी सभी जानकारियों को बताया गया है | कि आप कैसे अपने दस्तावेजों को सुरक्षित बरकरार रख के अपने आप को किसी भी फ्रॉड आदि से बचा सकते हैं |

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Author: adji

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