इंदौर दर्शन

इंदौर दर्शन

भारत के मध्य में मध्य प्रदेश राज्य है और मध्यप्रदेश के मध्य में इंदौर बसता है जो मिनी बॉम्बे के नाम से भी जाना जाता है।
फैशन, बिजनेस या खान पान की दृष्टि से इंदौर का नाम पहले आता है।
इंदौर अपनी कई विशिष्ट चीजों के लिये पहचाना जाता है जैसे इंदौर ने भारत को कई राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय स्तर के कलाकार दिए हैं। जैसे लता मंगेश्कर जानी वॉकर, सलमान खान, राहुल द्रविड़, मकबूल फिदा हुसैन, मुश्ताक अली, नरेन्द्र हिरवानी, विजेन्द्र घाटगे आदि ।
इंदौर मुबंई और दिल्ली के मध्य में स्थिति है । इंदौर से बस, ट्रेन व हवाई मार्ग के द्वारा चौबिसों घंटे आप कहीं भी आ जा सकते हैं । इंदौर शहर को भारत का सबसे साफ सुथर शहर होने का खिताब भी मिला है।

एक नजर डालते है इंदौर के प्रसिद्ध जगहों परः-

राजवाड़ा :
इदौर का केन्द्र राजवाड़ा है जो एक समय राजे महाराजाओं का निवास स्थान हुआ करता था। आज के समय में इसके आसपास बहुत बड़े-बड़े बाजार लगते हैं जहां पर आपको सभी प्रकार की चीजे़ं आसानी से मिल जाएंगी । इन जगहों पर इतनी भीड़़ रहती है कि यहां के पैदल ही चला जा सकता है। यहां इंदौर की लगभग पूरी आबादी खरीदारी करने आती है । खासतौर पर त्यौहारी मौसम में लोगों का यहां काफी आना-जाना लगा रहता है। खरीद फरोक्त का हर प्रकार के समान मिलने की वजह से यहां महिलाओं की भीड़ ज्यादा देखने को मिलती है। राजवाड़ा के ठीक पीछे स्थित है सराफा बाजार । जहां पर सोने चांदी की सैकड़ों आकर्षक दुकाने देखने को मिल जाएंगी।
पार्कः
इंदौर शहर के रेल्वे स्टेशन से मात्र एक किमी की दूरी पर एक बहुत बड़ा पार्क है । इसे नेहरू पार्क कहते हैं यह तकरीबन 100 साल पुराना पार्क है। यहां पर शनिवार-रविवार को काफी संख्यां में परिवार के साथ लोग आते है और अपना समय बिताते हैं ।
वहीं रेल्वे स्टेशन से 7 किमी की दूरी पर बहुत पुराना पिपलिया पाला पार्क है यह पार्क एक जमाने में शहर के बाहर हुआ करता था। यह एक तरह का पिकनिक स्पॉट था। जहां लोग खाना बनाकर एक पिकनिक की तरह एनज्वाय किया करते थे। और आज भी काफी संख्या में लोग यहां अस्थाई लकड़ी के चुल्हे पर खाना बनाना पसंद करते है।
शहर के विकास के साथ आज इंदौर इतना बड़ गया है कि पिपलिया पार्क शहर के अंदर मौजूद हो गया है।
वहीं आपको विजय नगर स्थिति मेघदूत पार्क मिलेगा जो आज से 25 वर्ष पूर्व बना था। यह एक बहुत ही बड़ा पार्क है जिसमें प्रतिदिन लोग अपने परिवार के साथ घूमने-फिरने या समय बिताने आते है । इस पार्क में मौजूद म्यूजिकल फाऊंटेन बड़ा ही आकर्षक है जिसमें संगीत की धूनों पर फाऊंटेन को लहराया जाता है जिसे देखने हर वर्ग के लोग आते हैं। इसे देखकर ऐसा लगता है मानो पानी की धारा संगीत की ताल पर गति कर रही है।

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कांच का मंदिर (शीश महल)  :
पूरी तरह कांच से बना जैन मंदिर लोगों के आकर्षण का एक केन्द्र है। यह बड़ा ही आकर्षक लगता है। कांच की कारीगरी देखने कला पारखी एवं आम लोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में यहां आते है। इसका निर्माण सेठ हुकुमचंद ने करवाया था। मगर मंदिर के अंदर फोटोग्राफी करना प्रतिबंधित है।
ओंकारेश्वर का मंदिरः
ओंमकार पर्वत पर बना यह मंदिर बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक है। इस मंदिर में मान्यता यह है कि प्रतिदिन शिव पार्वती चौसर खेलने यहां आते हैं। यहां एक गुप्त आरती होती है जिसमें गर्भ गृह पर पुजारी के अलावा और कोई नहीं जा सकता ।
बड़ा गणपतिः
बड़ा गणपति का मंदिर एक प्रमुख आकर्षण का केन्द्र है जिसमें लोग काफी संख्या में दर्शन करने आते हैं । 25 फीट ऊंचे गणपति की प्रतिमा 100 वर्ष पुरानी है । इसका निर्माण तत्कालीन होल्कर वंश के शासन काल में 1875 में रानी अहिल्या देवी की देखरेख में किया गया था। भगवान गणेश की एक प्रसिद्ध मंदिर खजराना मंदिर है जिसका निर्माण रानी अहिल्यादेवी होल्कर ने औरंगजेब से रक्षा करने के लिए बनवाया था।

गांधी हॉलः
रेल्वे स्टेशन से एक किमी की दूरी पर गांधी हाल नामक एक बड़ा परिसर है। जिसे एक लायब्रेरी के तरह बनाया गया है जहां शाम के वक्त विशेषकर बुजुर्ग लोग काफी आते हैं वहीं इसके सामने एक पार्क बना है जहां शाम को बच्चे आकर खेलते-कूदते हैं । गांधी हॉल में बहुत बड़ी घड़ी लगी है उस घड़ी के कारण इस जगह को घंटा घर भी कहा जाता है।
अगर आप प्राकृतिक सुंदरता को देखने के शौकीन हैं तो इंदौर से 30 किमी दूर टिन्चा फाल में आईए । टिन्चा नामक गांव में मौजूद होने के कारण यह टिन्चा फाल के नाम से जाना जाता है।
गीता भवन :
अगर आप एक ही जगह पर सभी भगवान के दर्शन करना चाहते तो आप पलासिया से एक किमी की दूरी पर गीता भवन आईए जहां पर सभी देवी देवताओं की एक से बड़कर एक प्रतिमाएं लगी हैं और वहां पर प्रत्येक दिन साधु संत आते रहते हैं। गीता भवन एक धार्मिक स्थल के रूप में काफी प्रसिद्ध हैं यहां सुबह और शाम महात्माओं के द्वारा प्रवचन दिया जाता है।

यहां से उज्जैन और मांडू दो ऐसी एैतिहासिक जगहें हैं जहां आप जा सकते हैं। उज्जैन इंदौर से 65 किमी दूर है तो मांडू 85 किमी दूर ।

इतिहास :
मालवा के गर्वनर दिलावार खान ने 1401 ई. में माण्डू को एक छोटे से राज्य के रूप में विकसित किया और इस प्रकार माण्डू का सुनहारा समय आरम्भ हुआ। इसके बाद दिलावर के बेटे होशांग शाह ने धार से माण्डू को अपनी राजधानी बनाया । फिर होशांग के बेटे मोहम्मद को ज़हर देकर मारने के बाद मोहम्मद खिलजी ने यहां 33 वर्षों तक शासन किया ।
खिलजी के बाद गियासुद्दीन के शासन यहां 31 वर्षो तक चला और फिर इसके बाद नासिरूद्दीन और बहादुर शाह ने शासन किया और फिर आग चलकर माण्डू को अकबर ने 1561 ई. में अपने राज्य में मिला लिया । और फिर 1732 ई. में यह मराठों के कब्जे में आया ।
उज्जैन को चौथी सदी में अवंति कहा जाता था। जब चद्रगुप्त मौर्य ने इसे अपने राज्य में शामिल किया । कहा जाता है कि सम्राट अशोक के पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा का जन्म उज्जैन में ही हुआ । यह उस जमाने की व्यवसायिक नगरी थी जहां से देश का व्यापार बहुत फैला हुआ था।
1731 के आसपास यह रानोजी सिंधिया के कब्जे में आ गया और फिर सिंधिया और हाल्कर वंश के राजाओं के बीच उज्जैन हथियाने को लेकर लड़ाईया चलती रहीं । और ब्रिटिश आने के बाद जब दोनों वंश ने ब्रिटिश की प्रभुत्ता स्वीकार कर ली । और इस तरह यह अंग्रेजों के कब्जे में आ गया । उज्जैन के व्यापारी ब्रिटिश विरोधी थे तो अंग्रेजों ने इसका महत्व कम करने के लिए इंदौर शहर को विकसित करना शुरू कर दिया। और आजादी के बाद मध्यभारत के अनेक हिस्सों की तरह उज्जैन भी मध्यप्रदेश में शामिल हो गया ।

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