चटोरों का शहर- इंदौर

चटोरों का शहर- इंदौर

आपको आज इंदौर की बात बताता हॅू। हाल ही में स्वच्छ भारत मिशन के सर्वे ने दूसरी बार इंदौर को भारत का सबसे साफ सुथरा शहर होने का खिताब दिया।
स्वच्छ इंदौर के अलावा इस शहर को एक और नाम से भी लोग पहचानते है। वह है “चटोरों का शहर- इंदौर”। सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्यों इसे चटोरों यानि खाने पीने के शौकीनों का शहर कहा जाता है?
एक कारण तो सीधे निकल कर ये आता है कि यहां खाने पीने के लजीज व्यंजन हर जगह

Indore Poha

तैयार मिल जाते हैं। और लोगों की भीड़ उन जगहों पर मिल जाएगी। इंदौर का सराफा बाजार आईए जहां खाने पीने का बाजार रात नौ बजे से शुरू होता है और आधी रात तक चलता है। और लोगों की भीड़ भी आपको वैसे ही देखने को मिलेगी।

सराफा बाजार की दो बड़ी विशेषता है

  • यहां शुद्ध देसी घी से बने हर प्रकार पकवान आपको मिल जाएंगे
  • दुकाने सराफा बाजार में प्रतिदिन सड़क पर अस्थाई रूप से रोज लगती है ।

 

कुछ जगह जो सराफा बाजार में खास तौर पर अपनी पहचान रखते है। वे है
जोशी जी के दही बडे़ – यहां दही बड़ा उत्तम क्वालिटी का मिलता है।
होटल राजहंस -दाल बाटी  के लिए
विजय चाट हाउस -कचौड़ी के लिए
संवरिया सेठ-नमकीन खट्टा मीठा नमकीन के लिए

आज हम अपने ब्लॉग के माध्यम से बताएंगे कि इंदौर के लजीज व्यंजन कौन-कौन से है? और वे कौन-कौन से खाने पीने की चीजें है जिसके कारण इंदौर प्रसिद्ध है । अगर खाने की बात की जाए तो खाने के मामले में इंदौर का पूरे भारत वर्ष में अपना अलग ही स्थान है।
खाने में सुबह का नाश्ता और रात का भोजन यहां दोनों ही खास है सबसे पहले सुबह के नाश्ते की बात करते है।
इंदौर के राजवाड़े, बस स्टैण्ड, एल.आई.जी. कार्नर जैसे इलाकों में सुबह 5 बजे जब रात का अंधेरा दूर नहीं हुआ रहता है ,जब लोग सुबह की सैर पर जाते है। उस वक्त भी आपको यहां पोहा कचौड़ी का स्वाद लेते हुए कई लोग मिल जाएंगे।
कहने का तात्पर्य है कि सुबह के 5 बजे से ही चटखारे लेते लोग यहां नजर आते है। तो क्यों ने ऐसे शहर को कहें चटोंरो का शहर? पोहा यहां एक प्रसिद्ध नाश्तों में शुमार है। मगर यह कई रूपों में तैयार किया जाता है जिसे हमने अलग-अलग वर्गो में बांटा है। आईए जाने वे क्या है?

पोहे के प्रकारः-
सादा पोहाः-

सादा पोहा इंदौर के प्रत्येक गली चौराहे पर आपको मिल जाएगा । जिसमें कई जगह आपको कड़ी पत्ते का तड़का लगा मिलेगा तो कई जगह आपको गरम मसाले का तड़के वाला पोहा भी मिलेगा। उसे और ज्यादा लजीज बनाने के लिए उसके अंदर मोटी बारिक सेव तीखी बूंदी डाली जाती है । कई जगह पर आपको अनार के दाने भी डले हुए मिलेगें । ये इंदौर का सादा पोहा है।

उसल पोहा :

एक तरह की तीखी सब्जी को उसल कहते है यह एकदम गहरे लाल रंग की दिखती है तथा इसमें मोठ डली रहती है । वहीं आपको कई जगह पर छोले पनीर की सब्जी मिलती है जिसको सादे पोहे पर गरमा गरम उसल वाली ग्रेवी सब्जी डालकर खाया जाता है।
कहीं -कहीं आपको पोहे में दही डालकर उसमें उसल डाली जाती है। फिर उसमें सेव, कटा प्याज, हरा धनिया, जीरावन का मसाला डाला जाता है। और इसे लोग बड़े चाव से खाते है। यह काफी तीखा होता है तथा तेज मिर्च के कारण इसे खाते हुए आंसू भी आ जाते है।

इसके साथ में आपको कचोड़ी समोसा और जलेबी भी मिल जाएगी। आप इसको अपनी इच्छानुसार पोहे के साथ चाय की चुस्की लेते लेते हुए इंदौर का प्रसिद्ध नाश्ता कर सकते है।
अब बात करते है कचौरी की

कचौरी के लिए इंदौर से अच्छी जगह आपको नहीं मिलेगी यहां कई प्रकार की कचौरी का मज़ा आप ले सकते है। यहां कचौरी कई प्रकार की मिलती है। कुछ की जानकारी हम यहां दे रहें है।

मूंग दाल की कचौरी:-यह कचौरी आपको प्रायः सभी दुकानों पर मिल जाएगी। इसमें मूंग दाल का प्रयोग किया जाता है। और यह काफी मुलायम तथा स्वादिष्ट होती है।
आलू की कचौरी
इसे बनाने में दाल की जगह आलू का प्रयोग किया जाता है। यह आपको राम बाग क्षेत्र में बहुतायत में मिलेगी ।
भुट्टे की कचौरी
जैसा की नाम से प्रतीत होता है कि इसका मसाला बनाने में भुट्टे का प्रयोग किया जाता है । और यह चुनिंदा दुकानों पर ही मिलती है।
हरे छोड़ की कचौरी :-इस प्रकार की कचौरी का अपना अलग ही स्वाद होता है। क्योंकि इसमें हरे छोड़ का प्रयोग किया जाता है यह कचौरी आपको राजवाड़ा और छप्पन दुकान पर मिलेगी।
तीखी कचौरी
इस प्रकार की कचौरी आपको सिर्फ सराफा बजारा वाले इलाके में ही मिलेगी। इसमें तीखापन अत्यधिक होता है जाहिर है तीखा खाने के शौकीन ही इसे खा पाएंगे क्यांकि इसमें मिर्च भरपूर रहता है।
उसल कचौरी:-इस प्रकार की कचौरी में उसल होने के कारण इसे उसल की कचौरी कहते है। और लोग बड़े ही चाव से इसे खाते है। अब समोसे की बात की जाए । वास्तव में इंदौर में मिलने वाला समोसा भारत के अन्य हिस्सों में मिलने वाले समोसे से अलग होता है । क्या है वे चीज़े जो इंदौरी समोसे को खास बनाती है।
समोसा:-
इंदौर का समोसा दूसरी जगहों के समोसे से अलग होता है शक्कर होने के करण इसमें थोड़ी मिठास होती है। जिसके कारण इसका स्वाद अलग ही होता है । इसे ईमली की चटनी डालकर खाया जाता है।
पानी पतासा
आपने पानी पतासा यानि गुपचुप प्रत्येक शहर में खाया होगा जिसकी विशेषता होती है खट्टा पानी
लेकिन जब इंदौर शहर का पानी पतासा खाएंगे तो आपको यहां पर दस से पंद्रह प्रकार के खट्टे-मीठे पानी मिलेंगी ।

जैसे लहसुन का पानी ,जीरा का पानी, खट्टा मीठा पानी इत्यादि। इतने तरह की आपको तो सिर्फ पानी के प्रकार मिलेगा।
और खाने से पहले उबले आलू में हरी चटनी मिलाया जाता है फिर पानी में डूबोकर आपको खिलाया जाता है। पानी पतासा इतने प्रकार का होता है कि खाने वालो को तय करना मुश्किल हो जाता है कि कौन से प्रकार का पानी पातासा खाना चाहिए।
अब नमकीन की बारी आती है।

विश्व प्रसिद्ध नमकीन

ये तो सभी जानते है कि इंदौर की पहचान नमकीन से होती है। इंदौर में अनेकों प्रकार के सेव,मिक्चर,गाठिया दाल मोठ जैसे बेहतरीन स्वाद वाली नमकीन मिलती है। और ये कई प्रकार की होती है आईए जाने वे क्या-क्या हैं?
सेवों के प्रकार :
लौंग की सेवः
लौंग की सेव यह सेव मोटी होती है। और तीखी होती है उसमें लौंग होती है। इसके कारण जायका बहुत ही स्वादिष्ट होता है। लोग इसे पसंद करते है।
सादी सेव
लौंग की सेव की अपेक्षा पतली, मुलायम होती है । इसमें तीखापन नहीं होता है। इसे सभी वर्गो के लोग पसंद करते है।
लहसुन की सेव
जैसा कि नाम से प्रतीत होता है । इसमें लहसुन होता है और लहसुन के कारण इसका स्वाद लोगों को काफी पसंद आता है।
टमाटर की सेव
टमाटर होने के कारण यह सेव लाल रंग की होती है । इसका स्वाद हल्का खट्टा होता है।
पालक की सेव
यह पालक की तरह हरी और मुलायम होती है। इसका स्वाद में पालक की प्रचुरता होती है ।
दूध की सेव
यह सेव दूसरे सेव से अलग तथा मंहगी होती है क्योंकि इसे बनाने में पानी की जगह दूध का प्रयोग किया जाता है जिसके कारण यह मुलायम और बहुत स्वादिष्ट होती है यह सभी दुकानों पर नहीं मिलती है।

मिक्चर के प्रकारः-

खट्टा मीठा मिक्चर
यह मिक्चर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। इसका स्वाद बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी को पसंद आता है। इस मिक्चर की खासियत है यह खट्टा मीठा स्वाद का अच्छा मिश्रण होता है।
तीखा मिक्चर
यह मिक्चर काफी तीखा होता है। जिसको लोग चाय के साथ खाना पसंद करते है।
सूखे मेवे वाला मिक्चर
यह दूसरे मिक्चर के मुकाबले काफी मंहगा होता है क्योंकि इसमें काजू,किशमिश बादाम इत्यादि मिले होते है। यह भी सभी दुकानों में उपलब्ध नहीं होता है।

दाल बाफला

बात हो गई है नाश्ते की अब बात करते है दिन के खाने की खासतौर पर इतवार के खाने की । इसमें आता है दाल बाफले का नाम । दाल बाफले को रविवार को खाने का अलग ही मजा है। बाफला वो होता जिसे मक्का और गेहूं के आटे को मिलाकर गूंथा जाता है।
और उसके बडे़-बडे गोले बनाकर पेड़ के पत्ते पर रख कर गूंथे गए गोले को उबलते पानी में छोड़ दिया जाता है। और वे आधे घंटे के बाद तैरते हुए ऊपर आ जाते है। जिस का मतलब होता है वे पक गए है फिर उसे आग पर सेका जाता है जिससे गोले फट जाते है। और फिर इस बाफले को घी में डूबाकर कुछ देर रखा जाता है। फिर खाने के लिए निकाला जाता है।
इस बाफले को दाल के साथ आलू की सूखी सब्जी, बैंगन का भर्ता और हरे धनिए की चटनी के साथ परोसा जाता है। यह पूर्ण रूप से शुद्ध घी से बना भोजन होता है। दाल बाफला को हाथ से खाने से इसका मज़ा दोगुना हो जाता है । और यह पेट के लिए काफी भारी होता है । इसको खाने के बाद दो घंण्टे की नींद जरूरी है । इसीलिए इसे रविवार को भोजन कहते है।
अब बात हुई है खाने पीने की तो इसके बाद में एक गिलास दूध पीना तो बनता ही है। आप रात के समय किसी भी चौराहे पर बड़े-बड़े दूध से भरे कढ़ाव देखने को मिल जाएंगे जहां पर आपको मलाई वाला काजू-किशमिश मिला गर्मा-गरम दूध का गिलास आधी रात तक आसानी से मिल जाएगा।
इंदौर का मशहूर पान
भोजन के बाद अगर इंदौर में इंदौरी पान मिल जाए तो खाना यादगार बन जाता है। यहां आप अगर पान की दुकान देखेंगें तो वे काफी स्टाइलिश होती है। कुछ दुकान पूरी तरह से वातानुकूलित होती है । इन दुकानों में आपको पान एक नहीं कई प्रकार के देखने व स्वाद में मिलेगें । आजकल पान के दुकानदार एक खास किस्म का पान खिला रहें है जो जलता हुआ रहता है , इसे सीधे ग्राहक के मुंह में दुकानदार डाल देते है।
हम इस ब्लॉग में चुनिंदा खाने-पीने की चीजें ही ले सके है हालांकि इंदौर में इनके अलावा और भी चीजे़ है जिन्हें हम अगली कड़ी में आपको बताएगें । अपने विचार अपने कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखिए!

adji

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