भारतीय टीम ने रचा नया इतिहास

भारतीय क्रिकेट टीम ने 70 वर्षो में नया इतिहास रचा

भारतीय क्रिकेट टीम का आस्ट्रेलिया दौरा अभी तक सबसे सफल दौरा साबित हुआ है । क्योंकि भारत ने इस दौरे में इतिहास रच दिया। उसने आस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर हराकर टेस्ट श्रंखला जीत ली जो पिछले 70 वर्षों से नहीं हुआ।
इस उपलब्धि से भारतीय टीम का नाम स्वर्णिम अक्षरों में क्रिकेट इतिहास में दर्ज हो गया है। गौर करने वाली खास बात यह है कि जो काम 70 वर्षो में भारतीय क्रिकेट के धुरंधर खिलाड़ी नहीं कर पाये वो काम विराट कोहली के सेना ने कर दिखाया। भारतीय टीम के कई महान खिलाड़ी जैसे सुनिल गावस्कर, कपिल देव, विश्वनाथ, विशन सिंह बेदी, मोहिंदर अमरनाथ, लक्षण गांगुली द्रविड़,सचिन तेंदुलकर इत्यादि कई बार आस्ट्रेलिया का दौरा कर चुके हैं लेकिन वे आस्ट्रेलिया को आस्ट्रेलिया में ही नहीं हरा पाये ।
विराट कोहली की कप्तानी में 7 जनवरी 2018 को यह इतिहास रचा गया । यह भारतीय क्रिकेट इतिहास ही नहीं बल्कि एशियाई क्रिकेट में एक बड़ा करनामा है क्योंकि आज तक कोई भी एशियाई टीम आस्ट्रेलिया को आस्ट्रेलिया में नहीं टेस्ट सीरिज नहीं हरा पायी है।

आज भारतीय टीम टेस्ट रेंकिग में नम्बर वन पर है। और उसने आस्ट्रेलिया को हराकर इस स्थान की गरिमा को और बड़ा दिया है। और अभी हाल ही में भारतीय टीम ने टेस्ट के साथ-साथ आस्ट्रेलिया को एक दिवसीय मुकाबलों में भी दो एक से हरा दिया। इस उपलब्धि से भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
एक दिवसीय सीरिज की अगर हम बात करें तो उसमें पहले एक दिवसीय मैच में रोहित शर्मा के शतक के बावजूद भी भारतीय टीम हार गई थी। सीरिज 1-0 से पीछे हो गई थी वहीं दूसरे एक दिवसीय मुकाबले में विराट कोहली के शतक के सहारे भारतीय टीम मैच जीत कर एक-एक की बराबरी पर आ गई थी ।
अंतिम एक दिवसीय मुकाबले में मेहंद्र सिंह धोनीऔर जाधव के शानदार अर्धशतक के द्वारा व चहल के छः विकेट के साथ भारत ने यह मैच जीतकर एक दिवसीय सीरिज अपने नाम कर लिया। टी-20 सीरिज की अगर बात की जाए तो भारत ने श्रंखला भी आस्ट्रेलिया में एक-एक की बराबरी पर ला खड़ा कर दिया। कहने का तात्पर्य है कि भारत ने तीनों श्रंखला में कोई भी श्रंखला नहीं हारी।
विश्लेषण ?

भारतीय टीम का मजबूत पक्षः-

भारतीय टीम का वर्तमान में सबसे मजबूत पक्ष उसकी गेंदबाजी है। क्योंकि भारतीय गेंदबाजों ने प्रत्येक मैच में आस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों के पूरे 20 विकेट चटकाए थे । किसी भी टीम को अगर टेस्ट मैच जीतना होता है तो सामने वाली टीम के 20 विकेट गिराना अनिवार्य होता है।
बड़े-बड़े स्कोर बनाने के बावजूद भी पहले आस्ट्रेलिया दौरों में भारतीय गेंदबाज आस्ट्रेलिया टीम के 20 विकेट नहीं गिरा पाये। लेकिन इस बार भारतीय तेज बॉलर व स्पीनर ने मिलकर आस्ट्रेलिया की टीम को प्रत्येक मैच में दो बार आउट किया है दूसरे टेस्ट मैच व चौथे टेस्ट मैच की दूसरी पारी को छोड़कर ।
जसप्रीत बूमराह, शमी, भुवनेश्वर कुमार, ईशान शर्मा ने हमेशा आस्ट्रेलिया के बल्लेबाजों को बांधकर रखा था। इनको दूसरे टेस्ट मैच के अलावा कभी भी बड़ा स्कोर बनाने को मौका नहीं दिया। जसप्रीत बूमराह ने जिस प्रकार से अपनी स्वींग गेदबाजी की है उसका भारतीय टीम के जीत में बहुत बड़ा योगदान रहा है । वहीं समय-समय पर कुलदीप यादव और जड़ेजा ने स्पींन विभाग में जिस प्रकार से समय-समय पर विकेट लिए हैं वह भी काबिले तारीफ है।
यू तो भारतीय टीम की पहचान बल्लेबाजी से हमेशा रही है लेकिन इस बार भारतीय बल्लेबाजों ने पुजारा और कोहली के अलावा किसी ने कोई खास प्रर्दशन नहीं दिया। पुजारा ने जरूर इस टेस्ट सीरिज में तीन शतक लगाए थे वो भी मुश्किल भरे हालात में । जिस तरह से उन्होंने भारतीय टीम के स्तम्भ के रूप में काम किया और उनकी इसी विशिष्ट बल्लेबजी के लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरिज का पुरस्कार भी दिया गया ।हांलाकि ओपनिंग जोड़ी की बात की जाए तो मुरली विजय व के एल राहुल पूरी तरह से असफल रहे। वहीं मध्यम क्रम के बल्लेबाजों ने भी एक औसत दर्जे की बल्लेबाजी की थी । हांलांकि चौथे टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाजों ने चिरपरिचित अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 600 से अधिक रन बनाए थे। जिसमें पंत की सैंचुरी भी बेमिसाल थी। लेकिन अगर हम फिर भी इस टेस्ट सीरिज की जीत का सेहरा बंधेगा तो वह भारतीय गेंदबाजों और पुजारा के सिर पर बधेंगा । भारतीय क्रिकेट टीम ने जिस प्रकार से आस्ट्रेलिया में प्रर्दशन किया उससे यही उम्मीद की जाती है कि भविष्य में इंग्लैण्ड, अफ्रीका और न्यूजीलैण्ड जैसी टीमों को भी उन्हीं के घर में टेस्ट व वन -डे सीरिज में उनको हराएगी।

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Author: adji

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