जगदलपुर दर्शन

जगदलपुर दर्शन
जानिए बस्तर के जगदलपुर शहर को :

अगर आप ऐसी जगहों पर घूमने के शौकीन है जहां आपको प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ ग्रामीण संस्कृति की झलक मिल सके तो आपके लिए बस्तर जिले का जगदलपुर घूमना एक फायदे का सौदा होगा। यह छ.ग. की राजधानी रायपुर से दक्षिण में मात्र 305 किमी की दूरी पर है। आज हम अपने ब्लॉग में इसकी जानकारी देने जा रहें है, जिसके बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी नहीं है ।

कैसे पहूॅचे यहांः-

अगर आप रायपुर से होते हुए जगदलपुर आना चाहते है। तो आप सड़क या रेल मार्ग दोनों से ही आ सकते है । यहां से हर घंटे छ.ग. राजधानी रायपुर से निजी बसें चलती है। बस का सफर 8 घंटे का है तो कार से 5 घंटे लगते है वहीं रेलमार्ग से 15 घंटा लगता है । क्योकि रेल वाया उड़िसा होते हुए आती है इसलिए रेलमार्ग लम्बा है। बस्तर पर्यटन के लिए मई से नवम्बर तक का समय सर्वोत्तम होता है। इसके अलावा तीज-त्यौहारों में यहां आने पर यह आपको और भी रूचिकर लगेगा।अगर मै समूचे बस्तर जिले की बात करूं तो यह छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिण पूर्व में मौजूद जरूर है मगर किसी हिल स्टेशन की तरह यहां की जलवायु है। यहां पहॅुचने से पहले भी आप कई मनोरम दृश्य का आनन्द ले सकते है। जैसे कांकेर में मौजूद ईसानवन,मलाजकुंडम,दुधावा,पिजाड़िन घाट केशकाल, कोंडागांव भद्रकाली का मंदिर, नारायणपुर परचनपाल संग्राहलय इत्यादि

जैसा कि आप जानते है विशाखापट्टनम

Danteshwari Temple Jagdalpur Bastar
Danteshwari Temple Jagdalpur

आंधप्रदेश का एक प्रमुख शहर है । वहां से समुद्री हवाओं का मजा लेते हुए भी आप जगदलपुर आ सकते है । वैसे विशाखापट्टनम और भी चीजों के लिए खास है जिसके बारे में हमने अपने ब्लॉग में चर्चा की है। जगदलपुर विशाखापट्टन से महज 300 किमी ही दूर है। और यह रेल तथा सड़क दोनों ही मार्गो से जुड़ा है।
ये जानकारी उन रास्तों के बारे में है जिनसे आप जगदलपुर पहुॅंच सकते है। जगदलपुर अपने हरी भरी वादियों और शांत वातावरण के लिए काफी प्रसिद्ध है साथ ही साथ यहां की वनस्पितियां और जीव-जन्तु भी कुछ विशेष महत्व रखते हैं ।
जगदलपुर छ.ग. के बस्तर जिले में स्थित है जिसकी आबादी 2011 के जनगणना के मुताबिक 2,39,808 है।
अब बात करते हैं उन जगहों की जिसके कारण जगदलपुर प्रसिद्ध है
यहां आने वाले लोगों के लिए वैसे तो बहुत सारे आकर्षक पर्यटक केन्द्र है और जगदलुपर से कुछ ही दूरी पर भी आपको मिल जाएंगे । कुछ का जिक्र यहां हम करते हैं।

चित्रकोट जलप्रपातः-

यह जगदलपुर के पूर्वी भाग में केवल 40 किमी दूरी पर स्थित है । यह जलप्रपात ऊँचे पहाड़ी से लगभग 100 फीट नीचे गिरता है । इस बहाव को देख लोगों ने इसे मिनी नयाग्रा का नाम दिया है और छत्तीसगढ़ पर्यटन केन्द्र भी इसे मिनी नायग्रा के नाम से प्रचार कर रहीं है । यह इस जिले के प्रमुख जगहों में से एक है।



वैसे तो यह प्रपात बारहों महिने आकर्षक लगता है, मगर बरसात के दिनों में इसकी खूबसूरती और भी निखर कर आ जाती है । प्रशासन ने यहां रूकने के लिए काटेज ,हॉटल्स का निर्माण कराया है जिसमें भारत के राष्ट्र्पति भी एक रात यहां रूके थे । रात में लाईट की रौशनी में यह काफी खूबसूरत लगता है।
तीरथगढ़ जल प्रपातः-यह जलप्रपात कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है। तथा इसे देखने के लिए आपको जगदलपुर से महज 35 किमी का सफर दक्षिण में तय करना होगा। मुनगाबहार नदी की धारा जब 300 फीट की ऊचांई से सीढ़ी नुमा चट्टानों पर बहुते हुए गिरती है तो इसका नजारा देखते ही बनता है। पानी से बना दुधिया झाग इसकी सुन्दरता में चार चांद लगा देते है। यहां वन विभाग और पर्यटन का एक होटल भी बना हुआ है जिसमें आप इस जलप्रपात का नजारा रात में देख सकते है।
दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा जगलपुरः देखने लायक जगहों की हम बात करें तो 500 साल पुराना दंतेश्वरी देवी का मंदिर प्रमुख आकर्षण केन्द्रों में से है और ठीक वैसा ही मंदिर जगदलपुर से 78 किमी दूर दंतेवाड़ा में भी आपको देखने को मिलेगा। जहां 10 सदी की बनी देवी दंतेश्वरी की मूर्ति आपको देखने को मिलेगी।
बारसूरः जगदलुपर से 105 किमी दूरी पर स्थित बारसूर भी पर्यटन के लिहाज से काफी प्रसिद्ध है । जहां आपको 11वीं व 12 शताब्दि के मंदिर देखने के लिए मिल जाएंगे। जिनमें प्रमुख है। मामा-भांजा का शिव मंदिर जिसके गर्भ गृह के मंडप आपस में जुड़े हुए है। वहीं चंद्रादित्य का मंदिर, और बत्तीसा मंदिर भी देखने को मिलेगा। बत्तीसा मंदर का निर्माण बलुआ पत्थरों से किया गया है। और यह गुण्डमहादेवी द्वारा सोमेश्वर के शासन काल में किया गया। इस मंदिर में शिव व नंदी की प्रतिमाएं भी देखने को मिलेगी । हजार साल पहले इसे बड़े ही वैज्ञानिक तरीके से बनाया गया था। जिसे पुरातत्व विभाग ने संरक्षित घोषित किया है । भगवान गणेश की विशालकाय प्रतिमा जो बलुआ पत्थर से निर्मित है – बहुत ही आकर्षक है। तथा प्राचीन मूर्तिकला का उत्कृष्ट नमूना है।
नारायण पाल का मंदिरः– 10 वीं सदी में निर्मित नारायणपाल का मंदिर भी प्रमुख आकर्षण का केन्द्र है ।यह चित्रकूट जलप्रप्रात के नजदीक ही एक गांव में मौजूद है ।इस मंदिर का निर्माण छंदक नागवंशीय राजा द्वारा 1111 ई. सन् में करवाया गया था। मंदिर के प्रांगण में गुडांदेवी (जो छिंदक वंश के राजा सोमेश्वर की मां थी।)के शिलालेख है । इससे यह पता चलता है कि इस जगह का कुछ हिस्सा दान के रूप में लोकेश्वर को

Bastar Narayanpal Temple
Narayanpal Temple

दिया गया तो कुछ भगवान विष्णु को । लिखित दस्तावेज ये पता चलता है कि यह मंदिर पूर्व में शिव मंदिर था जिसे बाद में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर विष्णु मंदिर कहा जाने लगा।
कुटुमसर गुफाः यह गुफा भी कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है । पूर्ण रूप से प्राकृतिक इस गुफा में चूने के पत्थरों की कई आकृतियां आपको देखने को मिलेगी जिसे देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी कलाकार ने सुंदर आकृतियां उकेरी है। यह गुफा तीरथगढ़ जलप्रपात के दूसरे हिस्से में देखने को मिलेगी । जहां जाने के लिए वन विभाग ने गाड़ी एवं टार्च की व्यवस्था की है। यहां के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र यहां मौजद अंधी मछलियां है जो गुफा में ही बहते पानी में तैरते हुए आपको मिलेगीं।
कैलाश गुफाः 1000 मीटर लम्बी तथा 125 मीटर गहरी यह प्राकृतिक गुफा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में है। यह 40 फीट ऊॅंची पहाड़ी पर स्थित है। यहां प्राकृतिक रूप से चूने के पत्थरों से बने स्टैलेकटाईट

Bastar Bell Metal Art
Bastar Art

तथा स्टैलेकमाईट की खम्बे देखने को मिलेगें ।
बांस तथा हस्त शिल्प कलाः
पर्यटन के लिहाज से बस्तर में तो बहुत कुछ है मगर हमने कुछ चुनिंदा जगहों की जानकारी ही आपको दी है। अब हम बताने जा रहें जिसके लिए बस्तर भारत ही नहीं विश्व के अनेक देशों में जाना-पहचाना जाता है। वह यह यहां की हस्त शिल्प और बांस कला।
बांस एवं बेल मेटल कला में बस्तर के संस्कृति की झलक देखने को मिलती है । जिसका निर्माण यहां के स्थानीय लोग परंपरागत तरीके से करते है । बांस के बने टोकरियां, बर्तन, तथा अन्य आकृतियां काफी प्रसिद्ध हैं तो वहीं बेलमेटल से बनी आकृतियों में बस्तर के तीज-त्यौहारों की एक झलक देखने को मिलती है । दशहरा एवं गोचा त्यौहार में किए जाने वाले रस्मों की जानाकरी यहां की कला में साफ झलकती है। वहीं रहन-सहन को भी हस्तशिल्प कला दर्शाते हैं।
स्बसे बेहतरीन समय है जून से अक्टूबर के बीच जब यहां का प्रमुख पर्व दशहरा एंव गोचा मनाया जाता है ।

एक बार तो अवश्य आईए बस्तर में

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