सफलता के आड़े परिस्थितियां नहीं आती

सफलता के आड़े परिस्थितियां नहीं आती

हम आज के दौर में कभी भी किसी से पूछते है कि ये काम तुमने क्यों नहीं किया? या जीवन में तुमने फलां चीज़ क्यों नहीं कर पाए ?
तो अधिकांश लोगों को यही कहना होता है कि मेरे साथ विपरित परिस्थितियां रही है। नहीं तो मै जीवन में कुछ कर चुका होता ।
दोस्तो! यह वाक्य जो भी व्यक्ति बोलता है वह मेरी नज़र में वह बहाने बनाता है । वह अपनी अक्षमता को परिस्थिति पर थोपता है ।

कौन सफल होता है?

जिस व्यक्ति में प्रतिभा होती है उसे हालात ज्यादा समय तक नहीं रोक सकते है। वह आदमी देर से ही सही अपने मुकाम पर जरूर पहॅुचता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है। वे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे अब आप ही अंदाजा लगाईए कि जो व्यक्ति बचपन में चाय बेचा करता था। वह कितनी विपरित परिस्थितियों से गुजरा होगा । उनमें प्रतिभा, लगन थी और वे इसी कारण आज इस मुकाम पर है। अगर हम बात करे फिल्म उद्योग या क्रिकेट की दुनियां की तो हम इसमें देखेगें की अधिकांश लोग मध्यम वर्गीय परिवार से ही आए है। वर्तमान में बुमराह, मोहम्मद शमी और हादी पाण्डया जैसे क्रिकेट खिलाड़ियों की बात करें तो ऐसे है जिनके पास अपने संघर्ष के दिनों में पहनने के लिए स्वयं के जूते भी नहीं हुआ करते थे। वहीं फिल्म उद्योग में नवाजुद्दिन, राजपाल यादव और अक्षय कुमार जैसे सफल कलाकार है जिन्होंने रातें अपनी स्टेशन में भी सोकर गुजारी है। और संर्घष करते हुए सफल हुए है।

परिस्थितियां रूकावट नहीं

अगर विपरित परिस्थितियां इंसान को तरक्की से रोक देती तो आज ये लोग आज सफल नहीं होते । अगर परिस्थितियां ही सफलता या असफलता का मापदंड होती आज कई बड़े खिलाडियों के बच्चे जो सुपर फ्लाप हो गए है वे आज सफल खिलाड़ी होते । क्योंकि इन्हें तो अच्छी परिस्थितयां मिली थी फिर क्यां नहीं बन पाए । वे उन उचाईयां क्यों नहीं छू सके जिसे इनके पिता ने छूआ था। वहीं अगर हम देखें फिल्मी दुनियां में तो वहां पर भी कई सुपर स्टार के बच्चे गुमनामी की दुनियां में जी रहें है।
दोस्तों! परिस्थतियां कभी भी परिणाम में अंतर नहीं लाती है बल्कि आदमी की सोच परिणाम में अंतर लाती है। आईए! एक कहानी के माध्यम से आपको हम स्पष्ट करते है।

किसी गांव में एक महिला थी जिसने चार बच्चों को एक साथ एक ही समय में जन्म दिया था। जिनका पालन पोषण भी एक साथ किया था। चारों बच्चों को मॉं ने अपना दूध पिलाया था। और कुछ समय के बाद बच्चे थोड़े बड़े हुए तो उन बच्चों को मां ने एक ही गाय का दूध पिलाया। एक ही स्कूल में भर्ती कराया । वे जिस स्कूल में जाते थे । एक साथ एक ही रस्ते से जाते थे। स्कूल में एक ही अध्यापक उनको पढ़ाता था। वह एक ही रूम में रहते थे एक पेड़ के नीचे खेला करते थे। इसके अलावा वे जो रोटी खाते थे वे भी एक ही चक्की के आटे से बने होते थे । कहने का मतलब है कि जन्म से लेकर उनकी जवानी तक उन चारों को परिस्थतियां बिलकुल एक ही मिली है। उस मॉं ने बच्चों में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं किया था। लेकिन एक समय के बाद उन चारों बच्चों में से एक आईएएस अधिकारी बना तो एक अध्यापक बना वहीं एक आतंकवादी बना और एक बेटा डाकू बना। चार में से दो बच्चे गर्व का कारण बने तो दो शर्म का कारण बने ।

परिस्थितियां तो चारों बच्चों को एक ही मिली थी फिर ऐसा क्यों हुआ उस मॉं के लिए उसके बच्चों में से दो बच्चे गर्व और दो शर्म का कारण बने। परिस्थितियां ही अगर परिणाम की जिम्मेदार होती तो चारों बच्चों का एक ही परिणाम होता लेकिन ऐसा नहीं हुआ । आदमी अच्छा और बुरा बनता है अपनी सोच व कर्म के कारण । बाबा साहेब अंबेडकर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। वे जिन परिस्थितियों से निकलकर भारत के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाया वो एक मिसाल है ।वे विषम परिस्थितियों में पले-बढ़े और समाज में एक अच्छा स्थान पाया । उनका जीवन भी परिस्थितियों के अनुसार होता तो वे बुरे बन सकते थे । भगवान राम को भी विपरित परिस्थिति मिली थी और उन्होंने हर परिस्थितियों का दृढ़ता से सामना किया । और आगे बढ़ते गए।

दोस्तो! परिस्थितियां तो आपको पूरी ज़िंदगी विपरित ही मिलेंगी । चाहे वे घर के अंदर हो या बाहर । आज आप जिस दुनियां में जी रहें है उसी दुनियां में करोड़ों अरबों लोग भी जी रहें हैं लेकिन सबके परिणाम अलग-अलग है। वे परिस्थितियां की वजह से नहीं है बल्कि उनकी सोच की वजह से है।

adji

6 thoughts on “सफलता के आड़े परिस्थितियां नहीं आती

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