हैप्पी क्रिसमस

क्रिसमस पूरी दुनियां में 25 दिसंबर को मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन प्रभु इसा मसीह का जन्म हुआ था। यह इसाई समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार होता है। और इसे बड़ा भी कहा जाता है। क्रिसमस आने के 15 दिन पहले ही विभिन्न चर्च में कई तरह के कार्यक्रम शुरू हो जाते है । जिसमें नियमित रूप कई प्रार्थनाएं की जाती है। चर्च को सजाया जाता है और 25 दिसंबर के दिन चर्च को विशेष रूप से लाईट्स के द्वारा सजाया जाता है। और 25 दिसंबर की रात्रि 12 बजे विशेष प्रार्थना की जाती है और एक दूसरे को बधाई देते हुए गिफ्ट देते है। और कई जगह पर प्रभु- ईसा मसीह की झांकिया भी निकाली जाती है और उनके कार्यों को बताया जाता है। और इस दिन मोमबत्ती जलाकर विशेष प्रार्थना भी की जाती है।
25 दिसंबर को किन किन चीजों का खास महत्व रहता है।

क्रिसमस ट्री :-

क्रिसमस ट्री का इतिहास बहुत पुराना है। इसक्रिसमस ट्री को लेकर कई तरह की बातें कहीं गई हैं । इसकी शुरूआत जर्मनी से हुई थी जिसमें एक बिमार बच्चे को एक पिता ने खुश करने के लिए एक   ट्री  को सजाया था ताकि बच्चे को खुश रख सके । बस उसी दिन से क्रिसमस ट्री की शुरूआत हो गई। क्रिसमस ट्र्ी इस अवसर पर प्रत्येक घर आंगन में सजाकर लगाया जाता है। और बाजार में कई तरह के क्रीत्रिम पेड़ मिलते है जिससे क्रिसमस के रोज लोग अपने घरों में सजाने के लिए लगाते है।
दरअसल क्रिसमस ट्री स्पाईन या स्प्रूस प्रजाति के सदाबहार हरे रहने वाले पेड़ को कहते है जो आमतौर पर ठंडे प्रदेशों में उगता है। टेडी रूजवेल्ट जो अमेरिकी राष्ट्र्पति थे उन्होंने पर्यावरण के कारणों के मद्देनजर 1923 में व्हाईट हाउस में क्रिसमस ट्र्ी सजाने से प्रतिबंध लगाया दिया था।
संता क्लाज़ः क्रिसमस पर सफेद दाढ़ी और लाल सफेद लिबास में लिपटा बुजुर्ग को संता क्लॉज कहा जाता है । एसी मान्यता है कि ये सांता क्लॉज हर क्रिसमस में बच्चों के लिए कुछ न कुछ उपहार लेकर आता है । आईए बात करते है सांता क्लॉस की कहानी के बारे में कुछ लोगों की मान्यता है कि ये एक पूर्णतः काल्पनिक पात्र है । चुकिं बाईबिल में इसका कहीं कोई जिक्र नहीं है।
जिक्र हो भी नहीं सकता क्योंकि सांता क्लॉज यानि संत निकोलस का जन्म जीसस के मरने के 280 वर्षो के बाद हुआ। संत निकोलस के माता-पिता बचपन में ही गुज़र गए थे । बड़े होकर वे पादरी और फिर बिशप बने । शुरू से ही वे काफी अमीर थे। जरूरतमंद और बच्चों को उन्होंने मदद किया करते थे । खास बात ये थी कि वे आधी रात को ही लोगों को चुपके से मदद पहॅुचाते थे उन्हें सामने आकर मदद करना पसंद नहीं था।
सांता क्लॉज के बारे में भी एसी की बातें काफी लम्बे समय तक प्रचलित थी कि वे बच्चों को आधी रात को उपहार देने आते है। इसीलिए क्रिसमस के दिन बच्चों को जल्दी सुला दिया जाने लगा।
संत निकोलस की दरियादिली की किस्से काफी मशहूर है । कहते है कि एक पिता की तीन बेटियां थी जिनकी शादी गरीबी की वजह से नहीं हो पा रही थी तब निकोलस ने बेटियों की जुराबों में सोने के सिक्के चुपचाप डालकर उनकी मदद की थी ।
ये परम्परा आज भी देखने को मिलती है बच्चे अपनी जुराबे इस उम्मीद से लटकाते है ताकि उनकी जुराबें भी सोने की सिक्के आ जाए।
इसी परंपरा का अनुशरण करत हुए फ्रांस में भी चिमनी पर जूते लटकाने की प्रथा है तो वहीं हालेण्ड में बच्चे जुराबें में गाजर भर कर रख देते है ताकि सांता के रेंडियर्स उसे खा सकें ।
कहने का तात्पर्य यह है कि सांता क्लॉज को पूर्णतः काल्पनिक कहना अनुचित होगा । संता क्लॉज की परिकल्पना प्ररित है संत निकोलस की दरियादिली से और वर्तमान संता क्लॉज का अस्तित्व आया 19 वी सदी में ।
केकः
क्रिसमस केक एक अन्य आर्कषण होता है जो प्रत्येक क्रिसमस पर पमुख तौर पर बनाया जाता है। इसकी बकायदा शुरूआत 16 सदी में ही हुई । और फिर तब से प्रत्येक क्रिसमस के अवसर पर बनाया जाने लगा।
वर्तमान केक में तो कई तरह के कई चीजें होती है मगर 16 सदी से पहले बनाये जाने वाले क्रिसमस केक में मोटा दलिया और शोरबा या रबड़ी होता था।जिसमें अंगूर, किशमिश इत्यादि मिलाकर बनाया जाता था। इस प्रकार के केक का चलन 1573 ई में देखा गया था। जिसे क्रिसमस की संध्या पर लोगों को परोसा जाता था।
स्टार यानि बड़े तारे
अब बात करते है एक बड़ा स्टार यानि बड़े तारे के बारे में । जानकार लोगों के अनुसार जब जीसस पैदा हुए थे आसमान पर एक सितारा चमका जो इस बात का प्रतीक था कि कोई असामान्य इंसान का जन्म हुआ है। इसी तरह बैथलेहम में (यीशु का जन्म स्थान ) एक बड़े स्टार को देखकर ही तीन बुद्धिमान पुरूष यानि राजा उस दिशा में बड़े जहां जीसस का जन्म हुआ । इसीलिए प्रत्येक घरों में स्टार लगाने की परम्परा चल पड़ी है।
मोमबत्तीयांः
हालांकि इसका स्थान आजकल इलेक्ट्र्ीक बल्ब ने ले लिया है मगर मामबत्ती की महत्ता कम नहीं हुई है । ये भी बैथलहम के अनगिनत तारों का प्रतीक है जो दिशा प्रदान करते है।
लाल और हरा रंगः
लाल और हरा रंग का अपना महत्व है ।लाल रंग पवित्र बैरी और यह सूली पर चढ़ने के दौरान बहे जीसस के खून का प्रतीक है जबकि हरा रंग प्रगति और विकास का प्रतीक है। रोमन निवासी अपने घरों को हरे रंग से सजाते है और क्रिसमस ट्री अनिवार्य रूप से लगाने का चलन है क्योंकि ये विकास को इंगित करते है।
क्रिसमस घंटी :- यह जीसस के जन्म और मौसम के आगमन का प्रतीक है जिसमें ये सूचना मिलती है कि अब जीसस का जन्म हो चुका है। तथा पवित्र महिना शुरू हो चुका है।

इस तरह क्रिसमस से जुडी बातों को हमने आपसे साझा किया है । उम्मीद है आपको पसंद आयेगा। कृपया अपनी टिप्पणियां हमें अवश्य लिखें

Please follow and like us:
20

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.