बस्तर जिले की कला

बस्तर जिले की कला
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कई प्रकार के तीज त्योहार मनाया  जाता हैं यह भारत का वनाछादित भू भाग हैं यहां के लोग अधिकतर गावों मे निवास करते हैं ।यहां कि ज्यादातर जनसंख्या खेती करते हैं ।वन बाहुल्य यहां के लोग खेती के साथ ही साथ अनेक प्रकार कलाकारी भी
करते है ।जिसमें काष्टकला,लौह कला,मिट्टी कला,घडवा कला बेलमेटल, आदि विभिन्न कलाओ के लिए पूरे दुनिया मे प्रसिद्ध हैं। कोंडागाँव मे शिल्प ग्राम , कुम्हारपारा ,नगरनार तथा जगदलपुर प्रसिद्ध है।

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 घड़वा कला -घड़वाकला एक प्रसिद्ध कला है तथा यह देश विदेश में प्रसिद्ध है इसे तैयार करने के लिए कांसा को पिघलाया जाता है तथा कई प्रकार के आकृति देते हैं
पूजापाठ केअलावा गांवो मे देवी दे्वत़ाओ मे भी उपयोग किया जाता हैं ।देवी देवता मे घोडा ,बैल, आरती के लिये, पूजा के लिए ,घरों मे साज सज्जा के लिये ज्यादातर उपयोग होता हैं।अपने देश के अतिरिक्त विदेश मे इसका मांग अधिक है।
लौहकला –   यह भी एक प्रसिद कला  है इस कला को तैयार करने के लिए कलाकार को बहुत ज्यादा मेहनत करना पडता  है लोहा को पिघलाकर विभिन्न आकृति देता हैं।साज  सज्जा के अलावा पूजा में भी उपयोग होता है।
इसे भी.बस्तर  जिला मे परचनपाल एवं  कोंडागाँव  मे अधिकाशतः बनाया जाता हैं।कलाकारो को इसके मेहनत के अनुसारउचित दाम नहीं मिल पाता।
 काष्ठकला :-बस्तर मे जगलों कि बहलता है यहां के जगलों मे सागौन ,साल ,शीशम ,बीजा जैसे बहुमूल्य लकड़ी पाया जाता हैं इसलिए यहाँ पर गाँव से लेकर शहर तक अधिकतर उपयोग लकड़ी का होता हैं  .इसलिए लकड़ी के कारीगर बहुत अधिक है । नकाशीदार मूर्तीया फर्नीचर के अलावा विलासिता के प्रमुख केन्द्र है।यहां कि बहूमूल्य मूर्तिया बडे बडे शहरों एवं विदेशो मे निर्यात किया है।
जगदलपुर के मूर्तिलाइन मे विकय के लिए दुकाने साल भर लगी रहती है।
मिट्टी कला :- मिट्टी कला का सबध बस्तर जिले मे प्राचीन काल से है यहां के लोग पूजा से लेकर शादी विवाह तीज
   तंयोहार मे भी उपयोग किया जाता हैं ।पुराने जमाने  के लोग मिट्टी के बने बर्तन जिसे  हंडी कहा जाता हैं जिसमे खाना बनाते थे जो सेहत के लिए अच्छा है अभी भी गांव में मिटटी के बत्तनो में खाना बनाते है कुम्हार जाति ही गाँव मे अधिकाशतः यह काम  करते है। मिट्टी के बर्तन गांवो के अलावा शहर के हॉट बाजारों मे आसानी से मिल सकता हैं। मिटटी के आकषर्क कला कृतिया मूर्ति साजसज्जा  केलिए उपलब्ध हैं।कोंडागाँव के कुम्हारपारा , भेलवापदर ,जगदलपुर एव नगरनार में इसके कई विक्रय केन्द्र हैं।इसके कलाकार देश विदेशो मे धाक जमा चुके हैं।

बस्तर की कला

बास कला :- बस्तर के जंगलो मे बांस कज घने वन पाये जाते है।बांस के बने सूपा,टूकना टोकरी पूजा से लेकर दैनिक जीवन मे उपयोगी है ।शादी विवाह मे महुँड परला का उपयोग किया जाता हैं।इसके अलावा सोफा पलंग टेबल चेयर का भी देश  विदेश मे बहुत मांग हैं।

adji

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