Importance of Holi होली का महत्व

Importance of Holi होली का महत्व

होली का त्यौहार नजदीक आते ही लोगों में इस त्यौहार को लेकर कई तरह की बातें आतीं है, जिनमें अधिंकाशतः भ्रांतियां ही होती है। मसलन, ये गंदा त्यौहार है और इसके रंगों से स्कीन खराब होने डर होता है वगैरह वगैरह । मगर यह त्यौहार कई मायनों में खास है और इसके जो वैज्ञानिक प्रभाव शरीर पर पड़ते है। उससे आप इंकार नहीं कर सकते है आईए चर्चा करते है। क्या इसका महत्व है और हमारे पूर्वजों ने इस त्यौहार को मनाने के पीछे क्या दलीलें दी है। हम आपको बता देें कि होली को अगर सही ढंग से मनाई जाय यानि बकायदा सही रंगों का उपयोग किया जाए तो होली के रंग स्कीन के लिए काफी फायदे मंद होते है।

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वैज्ञानिक महत्व:-

आपने महसूस किया होगा कि होली का त्योहार तब आता जब मौसम में बदलाव की वजह से एक निद्रापन या आलस्य का मूड बनने लगता है, क्योंकि इस समय गर्मी के मौसम की शुरूआत होने लगती है । सम्भवतः शरीर की शिथिलता को दूर करने के लिए ही हमारे पूर्वजों ने यह त्यौहार बनाया है। ढोल नगाड़ों की थाप, हाई वोल्यूम का संगीत, हुड़दंग करता महौल ये सब आलस्यता दूर करने के बहाने ही तो है।
चिकित्सकीय अनुसंधान बताते है कि रंगों का शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और वह यह रंग और गुलाल त्वचा में जब लगते है तो इससे त्वचा के आयन मज़बूत होते हैं । और यह और भी खूबसूरत लगने लगती है।
और दूसरा होलिका दहन करने के पीछे मकसद ये है कि जब ठंड के मौसम का अंत होता है और गर्मी की शुरूआत होती है तो इस बीच बैक्टिरिया काफी पनपते हैं और इनसे बिमारियों के बढ़ने की आशंका भी तो जाहिर है होलिका दहन के माध्यम बैक्टिरिया को खत्म करने का एक बहाना है । पंरम्परागत तौर पर होली जलने के बाद जो आसपास का तापमान 145 फैरनहीट हो जाता है और जब लोग एसे आग के चारों ओर परिक्रमा करते हैं तो शरीर की त्वचा में मौजूद बैक्टिरिया खत्म हो जाती है।
दक्षिण भारत में चंदन की तिलक नए पौधों की पत्तियों एवं आम की पत्तियों में लगा कर इसे खाया जाता है और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
होली के दरम्यान आसपास की साफ सफाई की जाती है और छुपा हुआ मकसद जाहिर है बैक्टिरिया को पनपने से रोकना और साफ सुथरे वातावरण से सकारात्मक ऊर्जा शरीर को मिलती है।

समाजिक महत्व:-

सामाजिक पहलुओं पर गौर करें तो इस त्यौहार में सभी वर्ग अमीर,गरीब एक रंग में रगा हुआ होता है और लोग आपसे में मिलजुल कर जब दोस्त परिवार के साथ होली मनाते हैं तो इससे समाज में भाईचारे का संदेश जाता है। आपसी वैमनस्य को भूलकर नए उत्साह के साथ मिलते हैं । कुल मिलाकर ये समाज और परिवार को जोड़ने के लिए ही मनाया जाता है।
भक्त प्रहलाद की कहानी से हमे से यह शिक्षा दी जाती है कि ईश्वर अपने भक्तों की हमेशा और हर विपरित परिस्थति में रक्षा करते है। चाहे उसके लिये प्रकृति का नियम ही क्यों न तोड़ना पड़े । जानकारी के लिए बता दें कि आग में बैठने के बावजूद प्रहलाद सुरक्षित था और उसकी बहन जिसे ये वरदान मिला था कि उस पर आग का कोई असर नहीं होगा वह जल कर खाक हो गई।
होली का त्योहार भारत के हर प्रांत में अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है । इससे पहले मै विश्व के उन देशों की चर्चा करता हूॅ जहां होली तो मनाई जाती है मगर उसके नाम अलग है । आईए जाने कौन कौन से हैं वे देश
स्पेन
होली यहां ’’ला टोमीटीना स्पेन’’ के नाम से मनाया जाता है। स्पेन के बनोल में यह त्योहार 1945 से मनाया जा रहा है। जो अगस्त माह के आखिरी महिने में मनाया जाता है। इसमें लोग एक दूसरे पर टमाटर फेंक कर खुशियां जाहिर करते हैं । और यह त्योहार स्पेन के अलावा और भी कई देश है जो मनाते हैं । स्पेन में ही यह ’’ला मेरेगांडा ’’नाम का त्यौहार होता है जिसमें अंडे और क्रीम फेकते हैं ।

आस्ट्रेलिया के नार्थ ईस्ट अर्नहेम प्रांत

में यहां के योलगु आदिवासी रंग बिरंगी पोशाक पहनकर एक दूसरे पर रंग डालते हैं ।
थाईलैंण्ड
यह त्यौहार सोगक्रन नाम से मनाया जाता है । इसमें लोग राहगीरांे पर पानी की बैछार करते हैं । इसके लिए सड़कों के किनारे पानी का ड्रम रखा जाता है। यह प्रतिवर्ष 13 से 15 अप्रेल के बीच मनाय जाता है।

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अफ्रीका
यहां यह त्यौहार आमेना बोंगा के नाम से मनाय जाता है। इस त्यौहार में जंगली देवता को जलाया जाता है ठीक हमारे यहंा के होलिका की तरह। इस देवता को वे प्रिंन बोंगा कहते है। इस दिन वे नाचते गाते हैं और नए फसल का स्वागत करते हैं ।
श्रीलंका
यहां की होली भारतीय होली की तरह होती है । लोग एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर रंगीन बना देते हैं ।
चेकोस्लावाकिया
यहां यह त्यौहार बलिया कनौसे के नाम से मनाया जाता है और यह भी भारतीय होली की तरह होता है । लोग एक दूसरे को रंग गुलाल लगाते हैं । और खुशियां मनाते हैं । इसके अलावा कैपटाउन में होली वन के नाम से लोग मनाते हैं ।
पोलैण्ड
यहां यह त्यौहार अर्सिना के नाम से मनाया जाता है । लोग एक दूसरे पर रंग डाल कर पुरानी दुश्मनी भूल जाते हैं । भाईचारे के लिए यह त्यौहार पोलैण्ड में प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
टैक्सास
इसमें कलरजाम नाम से होली मनायी जाती है और लोग इस दिन रंगों में डूबे रहते हैं।
फलोरिडा में लाईफ इन कलर नाम से यह त्योहार मनाया जाता है।

बात पते की
  • 1. खीरा के रस में थोड़ा गुलाब जल और एक चमम्च सिरका मिलाकर लगाने से होली रंग शरीर से मिट जाता है।
  • 2. बेसन में नीबू और दूध मिलाकर एक पेस्ट बना लें और फिर रंगों वाले जगहों पर मले । 15-20 मिनट के बाद गुनगुने पानी से धों लें । रंग मिट जाएगा।

adji

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