चमकी’ बुखार

बिहार के मुजफफरपुर में चमकी नामक बुखार से अब तक 122 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है। चिकित्सकी भाषा में चमकी नामक बुखार को इंसेफलाईटिस सिंड्रोम कहते हैं । छत्तीसगढ़ में इस बुखार को स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। दरअसल यह एक प्रकार का मस्तिष्क ज्वर है। बच्चों में ईम्यूनिटी कमजोर होती इसलिए 1 से 8 वर्ष बच्चे ही इसकी चपेट में आते हैं ।

क्या है चमकीबुखार ?

एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम को बोलचाल की भाषा में लोग चमकी बुखार कहते हैं. इस संक्रमण से ग्रस्त रोगी का शरीर अचानक सख्त हो जाता है और मस्तिष्क व शरीर में ऐठंन शुरू हो जाती है. आम भाषा में इसी ऐठन को चमकी कहा जाता है. इंसेफ्लाइटिस मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर समस्या है. दरअसल, मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं, जिसकी वजह से शरीर के सभी अंग सुचारू रूप से काम करते हैं.लेकिन जब इन कोशिकाओं में सूजन आ जाती है तो उस स्थिति को एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहा जाता है.

ये एक संक्रामक बीमारी है. इस बीमारी के वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में शामिल होकर अपना प्रजनन शुरू कर देते हैं. शरीर में इस वायरस की संख्या बढ़ने पर ये खून के साथ मिलकर व्यक्ति के मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं. मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस कोशिकाओं में सूजन पैदा कर देते हैं. जिसकी वजह से शरीर का ‘सेंट्रल नर्वस सिस्टम’ खराब हो जाता है.

बस्तरिया बियर

यह एक प्रकार का मादक पेय है जिसे आम भाषा में ताड़ी भी कहते है आदिवासियों जीवन में सल्फी मादक पेय ही नहीं बल्कि सामाजिकता का प्रतीक भी है जानते है क्या खूबियां है इस पेय में

इस कारण से चित्रकोट जलप्रपात सूख गया

जानिए क्या कारण है चित्रकोट जल प्रपात सूख गया है चंद दिनांे में ही चित्रकोट में पानी देखने को
मिला ठीक वैसे ही जैसे यह आमतौर पर देखने को मिलता है। बस्तर के नियाग्रा फाल समझे जाने वाले इस चित्रकोट
जलप्रपात में हर साल काफी संख्या में पर्यटक आते है । इस बार पर्यटकों के साथ पर्यावरण प्रेमी भी चित्रकोट फाॅल के
इस रूप पर अचंभित थे जानिए क्या है वें
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चमकी बुखार के लक्षण :-चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज बुखार रहता है. बदन में ऐंठन होती है. बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं. कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है. यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है और उसे झटके लगते रहते हैं।

मस्तिष्क रोग में जरूरी जांच:-एंसिफलाइटिस के दौरान डॉक्टर एमआरआई या सीटी स्कैन करवा सकते हैं. इसके अलावा इस बुखार की पहचान खून या पेशाब की जांच से भी हो सकती है. प्राइमरी एंसिफलाइटिस के मामलों में लंबर पंक्चर यानी रीढ़ की हड्डी से द्रव्य का सेंपल लेकर जांच की जाती है. इसके अलावा दिमाग की मस्तिष्क की बायोप्सी भी की जा सकती है.

बुखार आने पर क्या करें:

  • बच्चे को तेज बुखार आने पर उसके शरीर को गीले कपड़े से पोछते रहें.ऐसा करने से बुखार सिर पर नहीं चढ़ेगा.
  • पेरासिटामोल की गोली या सिरप डॉक्टर की सलाह पर ही रोगी को दें.
  • बच्चे को साफ बर्तन में एक लीटर पानी डालकर ORS का घोल बनाकर दें. याद रखें इस घोल का इस्तेमाल 24 घंटे बाद न करें.
  • बुखार आने पर रोगी बच्चे को दाएं या बाएं तरफ लिटाकर अस्पताल ले जाएं.
  • बच्चे को बेहोशी की हालत में छायादार स्तान पर लिटाकर रखें.
  • बुखार आने पर बच्चे के शरीर से कपड़े उतारकर उसे हल्के कपड़े पहनाएं. उसकी गर्दन सीधी रखें.

बुखार आने पर क्या न करें

  • बच्चे को खाली पेट लीची न खिलाएं.
  • अधपकी या कच्ची लीची का सेवन करने से बचें.
  • बच्चे को कंबल या गर्म कपड़े न पहनाएं.
  • बेहोशी की हालत में बच्चे के मुंह में कुछ न डालें.
  • मरीज के बिस्तर पर न बैठें और न ही उसे बेवजह तंग करें.
  • मरीज के पास बैठकर शोर न मचाएं.

सावधानी:-

  • गर्मी के मौसम में फल और खाना जल्दी खराब होता है।
  • घरवाले इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे किसी भी हाल में जूठे और सड़े हुए फल नहीं खाए।
  • बच्चों को गंदगी से बिल्कुल दूर रखें।
  • खाने से पहले और खाने के बाद हाथ जरूर धुलवाएं।
  • साफ पानी पिएं, बच्चों के नाखून नहीं बढ़ने दें।
  • बच्चों को गर्मियों के मौसम में धूप में खेलने से भी मना करें।
  • रात में कुछ खाने के बाद ही बच्चे को सोने के लिए भेजें।
  • डॉक्टरों की मानें तो इस बुखार की मुख्य वजह सिर्फ लीची ही नहीं बल्कि गर्मी और उमस भी है।
  • बच्चों को धुप से बचाएं ,और घर में ज्यादा उमस वाले जगह से बच्चों को दूर रखें।