बस्तर के जलप्रपात एवं गुफाएं

बस्तर के जलप्रपात एवं गुफाएं
प्राकृतिक सुंदरता :-

छ. ग. राज्य के दक्षिण में स्थित बस्तर जिला अपने प्राकृतिक सुदंरता के लिए विश्व भर में विख्यात है। यहां की वन सम्पदा,नदियां, वन्य जीवन और संस्कृति हमेशा से ही पर्यटकों को आकर्षित करती रही है
यहां के झरने एवं जलप्रपात मानो प्रकृति की धरोहर है। 29 फीट उचा यह तीरथगढ़ जलप्रपात है।
जिला मुख्यालय जगदलपुर से 35 किमी दूर यह तीरथगढ़ जलप्रपात दरभा बॅक के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अन्तर्गत आता है । राष्ट्रीय राजमार्ग 16 से महज 10 किमी दूर इस प्रपात पर पहूॅचने के सबसे बेहतरीन जरिया है -सड़क मार्ग।
इसके लिए ग्राम केशलूर से हैदराबाद जाने वाली सडक उत्तम है।

तीरथ गढ़ में तीन फाल है।जो इसकी सुदरता को चार चांद लगाते है।
सीढ़ीयों से उतरते पर्यटक जब फाल के नजदीक आते है तो इसकी भव्यता देखकर यहां तक पहूॅचने की थकान वे भूल जाते है. मानो फॉल उन्हें पे आगोश में लेकर आराम करने का अवसर दे रही है /
वैसे यहां वर्ष भर पर्यकट  की भीड़ लगी रहती है ,मगर सर्दियों की शरूआत होते ही भीड़ दोगुनी हो जाती है।
बस्तर जिले में चित्रकोट जल प्रपात के बाद तीरथढ़ जलप्रपात ही सैर-सपाटे के लिए उत्तम है।

पर्यटकों की तदाद को देखते हुए यहां व department ने ठहरने के लिए रेस्ट हाउस का निर्माण किया है जिससे पर्यटको रात में भी प्रपात का नजारा नजदीक देख सकते है ।
प्रपात के नजदीक छोट-छोटे होटल बने हुए है जो आर्डर करने पर भोजन / नाश्ता आपके लिए तैयार कर देते हैं। इसका निर्माण यहां के स्थानीयलोगों ने किया है।

तीरथ गढ़ का सफर तो खत्म होता है मगर …. दे जाता है कभी न खत्म होने वाली यादें जो इस जलप्रपात पर आने से हर पर्यटकों की होती है ।

कोटेमसर एवं कैलाष गुफा:-

राष्ट्रीय राजमार्ग 16 में स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर जिला का एक महत्वपूर्ण आर्कषण का केन्द्र है इसी उदृयान में जहां एक तरफ तीरथगढ़ जल प्रपात है तो दूसरी तरफ कोटेमसर एवं कैलाष गुफा मौजूद है—
पूर्णतः प्रकृति द्वारा निर्मित इन गफाओं तक पहॅंचने के लिए सडक मार्ग ही सबसे उत्तम है।
कैलाशगुफा जमीन से 40 मीटर उॅचे पहाड़ी पर स्थित है। जिसके अब तक ज्ञात लम्बाई 1000 मी. और गहराई 120 फीट है ।

यहां प्रवेश करने केलिए आजकल वन विभाग ने सीढ़ीयां बना दी है।

गुफा से थोड़ी दूर अैर जाने र चूने के पत्थर से निर्मित झूलते हुए स्टैलकटाईट और स्टैलेमाईट की खम्बों का सामना होता है दृ जिस बजानेपर तबले की ध्वनि निकलती है।
कुछ मीटर और आने पर 25 फीट चौड़ा और 35 मी. लम्बा हॉल नजर आता है जो प्रकृति की कलाकारी का अनूठा उदाहरण है । कुछ प्रमुख कलाकृतियांं को स्थानीय लोगों ने नाम करण भी कर रखा है , – जिसमें से एक के नाम ‘हाथी गुफा‘ तो दूसरे का नाम है भीम की गदा।
बहरहाल,कैलाश गुफा की बकायदा खेज 1993 में हुई मगर स्थानीय लोगों की माने तो इस गुफा के बारे में उन्हें पहले से ही ज्ञान था। मगर दुर्गम मार्ग के चलते इस तक पहुॅच पाना कठिन था
मगर आज स्थितियां बदल गई है कोटेमसर के मार्ग पर जाते हुए इस गुफा तक आसानी से जाया जा सकता है।

बारिश के अलावा एक अवसर ऐसा आता है जब पर्यटक यहां आते है वह है शिवरात्रि का त्यौहार । शिवरात्रि के समय इन जगहों पर पर्यटकों की तदात ज्यादा बढ़ जाती है।

adji

5 thoughts on “बस्तर के जलप्रपात एवं गुफाएं

  1. जी धन्यवाद ! Pandeyji, यहां पर्यटन और विकास की अपार संभावनएं हैं ।

  2. मैं बस्तर जा चूका हुँ. प्रकृति की गोद में बसा है बस्तर. Thanks for sharing

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