Bhujagasana Cobra Pose. भुजंगासन कैसे करें?

योग का देश ही नहीं विदेशों में भी काफी प्रचार प्रसार हो रहा है । विश्व के समस्त देशों के वैज्ञानिकों ने भी इसके महत्व को स्वीकार किया है। योग हरेक बिमारी से लड़ने में समर्थ है। यह एक ऐसी शारीरिक तथा आध्यात्मिक क्रिया है जिनसे शरीर में होने वाली सभी प्रकार की बिमारियों से लड़ने की क्षमता है। योगासनों में बैठकर, पेट के बल लेटकर या छाती के बल लेटकर अथवा खड़े खडे़ कई आसन है । आज जिस आसन के बारे में चर्चा करने जा रहें है वह है पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में आता है।
आज जीवन शैली के पीठ दर्द, कमर दर्द एक आम समस्या बन चुकी है । और इससे छुटकारा पाने के लिए कई प्रकार की दवाईयां लेकर हम अपनी समस्या को और भी बढ़ा रहें है। जबकि भुजंगासन के जरिए 3 चार सेकेण्ड के अभ्यास में ही आप अपनी इस समस्या से निजात पा सकते है। पर इसका अभ्यास प्रतिदिन करना होगा।

कैसे करते है भुजंगासन

पेट के बल लेट जाएं।

दोनों हथेलियों को अपने दोनों बगल में छाती के स्तर पर रखें दोनों कोहनियां पीठ की बगल में सटी हुई रहें।

सिर ज़मीन पर रहे। दोनों पैर सटे हुए रहें । धीरे-धीरे सांस भरते हुए सिर से नभि तक का भाग धीरे से ऊपर उठाएं तथा अपनी सामार्थ के अनुसार इसी अवस्था में कुछ सेकेण्ड रूक जाएं ।

फिर पुनः वापस अपनी पूर्व अवस्था में आ जाएं । दो से तीन बार शुरूआती अवस्था में करें और सात बार तक इसे कर सकते हैं ।

मधुमेह जिसे लेकर आज पूरा विश्व चिंतित है और इससे लड़ने के लिए नित नए-नए प्रयोग किये जा रहें है।
भुजंगासन करने से कई चमत्कारिक प्रभाव शरीर में देखने को मिलते है। इस आसन को कोबरा पोज़ भी कहा जाता है।

क्या हैं लाभः-

पीठ के दर्द में लाभकारी है।
पैनिक्रियाज यानि पाचन ग्रन्थि को सक्रिय करता है जिससे इन्सुलिन बनने में मदद मिलती है। अतः मधुमेह के रोगी को जरूर करना चाहिए।
पाचन शक्ति बढ़ाता है।
रीढ़ की हड्डी को लचकदार बनाता हैै।
गले के रोगों में लाभ दायक है।
मासिक धर्म संबधी समस्याओं में लाभ दायक है।
पेट की चर्बी कम होती है और बढ़ा हुआ पेट समतल हो जाता है।
तनाव से मुक्ति दिलाता है।

सावधानियां


गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें।
इस आसन को उस वक्त न करें जब आपका पेट दर्द कर रहा है।
इस आसन को करते समय शरीर को क्षमता से अधिक दबाव न दें ।

योगासनों को करने से पूर्व योग करने वाले को निम्न बातों का ख्याल रखना आवश्यक है ।

सबसे पहले योगासन, प्राणायाम और अंत में ध्यान का क्रम रखें ।
आसनों को करने का सही समय सुबह 5 से 7 बजे तक तथा शाम 6 से 8 बजे तक का समय उपयुक्त है । मगर ध्यान रखें कि आसनों को करने से पूर्व पेट साफ होना चाहिए यानि शौचक्रिया से निवृत होकर और भोजन के बाद योगासन करना चाहिए

आसन सही रीति से हो रहा है इसकी पहचान है कि आसन करने पर शरीर और मन में हल्कापन तथा खुशी महसूस होती है।
आसन करने के तुरंत बाद तेज हवा अथवा ठंड में नहीं निकलना चाहिए। यदि आसनों के बाद नहाना जरूरी हो तो कम से कम एक घंटे के बाद ही नहाना चाहिए।

आसनों को करने से पहले निम्न प्रकार की बैठने की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है।
सुबहः आप का चेहरा पूर्व की तरफ हो
शामः आपका चेहरा पश्चिम की तरफ हो
किसी भी समय: उत्तर की तरफ हो

वैसे तो आसन कभी भी किसी भी मौसम में किए जा सकते हैं परन्तु शरद ऋतु में आसनों को करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

शौच के बाद ही आसन करने चाहिए। नहाने का कोई बंधन नहीं है
आसनों करते समय अपनी क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। आसनों को करते समय शरीर पर ज्यादा जोर नहीं डाले ।
आसनों को करते समय आप तनाव मुक्त हों ।

किसी अनुभवी या योग प्रशिक्षक की देखरेख में आसनों को करना ज्यादा उपयोगी होता है।

आसन करने से पूर्व चाय,काफी या दूध ले सकते हैं । भरपेट भोजन करने के चार घंटे के बाद ही आसन करना चाहिए।
अगर आप खाली पेट आसन कर रहें हैं तो आसनों के आधे घंटे के बाद भोजन कर सकते हैं ।

आसनों को करने के पहले एक गिलास ताज़ा पानी पीना लाभ दायक है।

कठिन आसन सुबह और उत्तेजक आसन जैसे शीर्षासन, सर्वागासन और पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास शाम को करना लाभदायक होता है।

जहां आप आसन कर रहें हैं वह जगह खुली व हवादार होनी चाहिए। वहां शोरगुल न हों तथा आसनों को समतल ज़मीन पर करना चाहिए।

ये जानकारी प्रत्येक योग करने वाले को ध्यान में रखना चाहिए । अब आईए बात करते हैं  धनुरासन के बारें में जो आपको मधुमेह नियंत्रित करने के लिए करना चाहिए।

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Author: adji

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